बी प्रतिभा मेकअप स्टूडियो एकेडमी की संचालिका प्रतिभा दुबे ने कहा कि 8 मार्च को पूरा विश्व अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओं के प्रति सम्मान के प्रति के रूप में मनाता है. यह दिन विशेष रूप से एक महिला के मातृत्व संयम, संस्कार और उसकी क्षमता पहचान का दिन है. 8 मार्च अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का इतिहास 100 साल से भी अधिक पुराना है.
गुलाबी मानसिकता ने महिलाओं को घर की चारदिवारी में बांधे रखा
प्रोफेशनल मेकअप आर्टिस्ट प्रतिभा दुबे ने मीडिया को बयान दिया कि सन् 1908 में अमेरिका के न्यूयॉर्क के शहर में महिलाओं ने अपने प्रतिभा के विकास के लिए सड़कों पर प्रदर्शन किया. जिसमें वोट डालने का अधिकार, सरकारी नौकरी और उचित वेतन जैसी मुख्य समस्याएं थी. इसके बाद सन् 1910 में डेनमार्क में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा गया. सन् 1975 में संयुक्त राष्ट्र ने भी इसे व्यापक रूप से मंजूरी दे दी, तब से हर साल 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाने लगा. महिला समाज की आधारशिला मानी जाती है. हर परिवार में एक महिला लक्ष्मी के रूप में बहु, पत्नी, बेटी, मां बनकर परिवार को संभालती है और उसका पालन पोषण भी करती हैं. एक महिला अपने परिवार को मजबूत बनाती है तब जाकर एक-एक परिवार से पूरा समाज मजबूत होता है. जब समाज मजबूत होता है.
तब राष्ट्र के विकास का रास्ता सरल हो जाता है. 8 मार्च का दिन महिलाओं के स्वाभिमान व सामाजिक महत्व को सम्मानित करने का भी दिन है. एक नारी ने हमेशा समाज के विकास में और राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है. आज डिजिटल युग के हर क्षेत्र में महिला अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. आज घर से समाज को जागरूक करने, अध्ययन से अध्यापन , चौराहे से संसद भवन, हर एक क्षेत्र में नारी की उपस्थिति को देखा जा सकता है. अगर हम भारत के महान नारियों की बात करें जैसे उदाहरण के लिए- रानी लक्ष्मी बाई, कल्पना चावला, इंदिरा गांधी तथा अन्य भारत की महान नारियों ने भारत का मस्तक गर्व से ऊंचा कर दिया. इन्होंने भारत को विश्व में एक नई और विशेष पहचान दी. इसलिए 8 मार्च का दिन हमें इस बात के लिए भी प्रेरित करता हैं कि एक महिला को समाज में अधिकार, सम्मान, सुरक्षा का अवसर जरूर मिलना चाहिए.

हजारों सालों तक शिक्षा तथा अधिकारों से वंचित रही महिलाएं
प्रोफेशनल मेकअप आर्टिस्ट प्रतिभा दुबे ने आगे कहा गुलामी मानसिकता के कारण आज भी कुछ महिलाएं रुढ़िवादी परंपरा का शिकार है. उनका घर से बाहर निकलना और नौकरी करने का पारिवारिक आदेश नहीं है. कई क्षेत्रों में महिलाओं के प्रति भेदभाव, असमानता, शिक्षा और कम उम्र में विवाह जैसी प्रथा आज भी हमारे समाज में मौजूद हैं. कई घरों में महिलाओं को घरेलू हिंसा का आरोपी बना दिया जाता है. अतः इन समस्याओं को दूर करने के लिए समाज को संघर्ष करने की आवश्यकता है. हालांकि वर्तमान समय में महिलाओं की स्थिति में काफी सुधार हुए हैं. खेल, व्यापार, राजनीति, शिक्षा, ड्राइवर, स्पोर्ट, क्रिकेट आदि कई अन्य क्षेत्र में सफलता प्राप्त करके एक महिला अपनी सशक्त भूमिका निभा रही है. इसलिए महिला सशक्तिकरण आज के समाज कल्याण की सबसे बड़ी आवश्यकता है.
जब महिलाएं शिक्षित होने के साथ-साथ आत्मनिर्भर होंगी तो वे अपने परिवार और समाज को भी मजबूत बना सकती हैं. लेकिन इसके लिए समाज और सरकार को कदम से कदम मिलाकर चलना होगा. महिलाओं की शिक्षा व्यवस्था, सुरक्षा जागरूकता और उनके आत्मविश्वास को अधिक से अधिक बढ़ावा देना होगा. हर क्षेत्र में रोजगार की सुविधा उपलब्ध करानी होगी और प्रतिभाशाली छात्रों और महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए पुरस्कारों से प्रोत्साहित कराना चाहिए. तब जाकर हर एक नारी सशक्त और मजबूत होगी. नारी के विकास में ही विकसित भारत का भविष्य छिपा हुआ है. जैसे-जैसे नारी का विकास होगा वैसे ही विकसित भारत का रास्ता भी सरल होता जाएगा. इस प्रकार 8 मार्च का दिन महिलाओं के लिए एक उत्सव का दिन है. जो साल में केवल एक बार ही आता है. इसलिए हमें संकल्प लेना होगा कि हम प्रत्येक नारी को सम्मान और सुरक्षा देंगे.


