हमारा भारत भाषा, क्षेत्र, संप्रदाय की विविधता के साथ-साथ राजनीति विविधता का केंद्र रहा है. वर्तमान भारत अनेक राजनीतिक पार्टियों के समर्थन में जी रहा है यहां अनेक राजनीति विचारधारा वाले नेता जनता के समर्थन से क्षेत्रीय प्रतिनिधि बनकर संसद भवन में बैठे हुए हैं।
वर्तमान भारत की राजनीति चुनौतियों से पूर्ण
भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र माना जाता है और पार्टियों के बीच प्रतिस्पर्धा होना भी लोकतंत्र का एक स्वाभाविक हिस्सा है. चुनाव के समय यह प्रतिस्पर्धा और भी अधिक हो जाती हैं. अगर हम भारत के राष्ट्रीय स्तर के पार्टियों की राजनीति के बारे में बात करें तो इसमें सबसे पहले भाजपा और कांग्रेस का नाम आता है क्योंकि वर्तमान समय में सबसे अधिक प्रतिस्पर्धा इन्हीं दोनों पार्टियों में देखने को मिलता हैं. भाजपा के प्रधान नेता नरेंद्र मोदी जो भारत के प्रधानमंत्री के रूप में भारत के जनता की सेवा कर रहे है. प्रधानमंत्री जी की विशेषता उनके ओजस्वी भाषण में दिखाई देता है उनकी राजनीति विकसित भारत, मजबूत भारत, आत्मनिर्भर भारत की छवि के रूप में देखी जा सकती है.

भाजपा सरकार कांग्रेस के काले कारनामों को जनता के समक्ष रखती है. दूसरी तरफ राहुल गांधी जो कांग्रेस के उत्तराधिकारी माने जाते हैं उनके पूर्वज भारत की सत्ता को दशको से संभालते हुए आए हैं. कांग्रेस के कार्यकर्ता भी भाजपा सरकार की योजनाओं की आलोचना करते हैं. दोनों पार्टियां एक-दूसरे की आलोचना करते हैं यही वर्तमान भारत की राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है. उत्तर प्रदेश के राजनीति की बात करें तो यहां भी भाजपा और समाजवादी के बीच टकराव देखने को मिलता है। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तुलना की जाए तो योगी आदित्यनाथ जी की लोकप्रियता सबसे अधिक मानी जाती है क्योंकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हिंदुत्व के रक्षक, समर्थक होने के साथ-साथ कानून व्यवस्थाओं के संचालक माने जाते है.
लोकतांत्रिक देशों में अलग-अलग विचारधाराओं की पार्टियों का होना बहुत जरूरी
पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव विशेष रूप से मुसलमान और पिछड़े वर्गों के अधिकारों और समानता की बात करते हैं. जब-जब उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव आता है तब अखिलेश यादव और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच तीखे बयान सामने आते रहते है दोनों एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगते हैं. उत्तर प्रदेश में मुख्य रूप से भाजपा, कांग्रेस और समाजवादी के बीच लगातार प्रतिस्पर्धा रुपी संघर्ष चलता रहता है. भारत का चुनाव ही लोकतंत्र का सबसे बड़ा हिस्सा है और पिछले कुछ चुनाव में जनता ने अधिक से अधिक मतदान करके विश्व में भारत का मान बढ़ाया है.

चुनाव के समय ही सभी पार्टियां जनता को अपने योजनाओं के बारे में बताते हैं और उनका विश्वास जीतने की कोशिश करते हैं. अधिकतर नेता एक दूसरे की आलोचना भी करते हैं. लोकतांत्रिक देशों में अलग-अलग विचारधाराओं की पार्टियों का होना बहुत ही जरूरी है क्योंकि इससे जनता को हर चुनाव में अपना सरकार चुनने का विकल्प भी मिल जाता है. अलग-अलग विचारधारा ना रखने से भारत का लोकतंत्र कमजोर हो सकता है इसलिए यह आवश्यक है कि हर पार्टी अपनी एक अलग विचारधारा रखे लेकिन वह विचारधारा भारत और भारतीयता के पक्ष में होनी चाहिए और अंत में मैं यही कहना चाहूंगा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए यह आवश्यक है कि सभी पार्टियां संविधान, न्यायालय, मानवाधिकार और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करते हुए भारत की जनता की सेवा करें।
शम्भूनाथ गुप्ता पिछले 6 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत हैं. वे ‘मीडिया दस्तक’ और ‘बस्ती चेतना’ जैसे प्लेटफॉर्म्स पर न्यूज़ एवं वीडियो एडिटिंग टीम में अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं दे चुके हैं. न्यूज़ प्रोडक्शन, डिजिटल कंटेंट निर्माण और ग्राउंड रिपोर्टिंग में उन्हें गहरा अनुभव प्राप्त है. इसके साथ ही वे ‘भारतीय बस्ती’ में कंटेंट राइटर के रूप में भी कार्य कर चुके हैं, जहां उन्होंने उत्तर प्रदेश से जुड़ी खबरों के लेखन और डिजिटल प्रकाशन में अहम भूमिका निभाई. वर्तमान में वे ‘न्यूज़ ऑफ नेशन’ में संपादक के पद पर कार्यरत हैं और निष्पक्ष, गंभीर व सटीक पत्रकारिता के माध्यम से समाज से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से सामने ला रहे हैं.


