रमजान के पाक माह में दिखा शांति का वातावरण – प्रधानाचार्या मुस्लिमा खातून

बेगम खैर इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्या मुस्लिमा खातून ने भारत के सभी मुसलमान को रमजान और ईद की मुबारकबाद देते हुए कहा कि रमजान का महीना मुसलमानों के लिए पवित्र महीना माना जाता है क्योंकि इसमें सभी मुस्लिम भाई-बहन पूरे महीने तक रोजा रखते हैं और प्रातः काल से सायं काल तक भोजन और पानी का त्याग करते हैं. रमजान के महीने को इबादत, संयम और आत्मशुद्धि व आत्मनिर्भर का महीना माना जाता है. अर्थव्यवस्था की नजर से देखा जाए तो रमजान के महीने से भारत के अर्थव्यवस्था को काफी मजबूती मिलती है क्योंकि रमजान और ईद में बाजारों की खरीदारी चार गुना बढ़ जाती है.

रमजान ही भारत में अमन, शांति का वास्तविक त्योहार

प्रधानाचार्या मुस्लिमा खातून ने मीडिया से बात-चीत के दौरान बताया कि रमजान का महीना इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार नौवे महीने में मनाया जाता है. रमजान और ईद का त्यौहार इस्लाम मजहब के लिए पवित्र और महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है. रमजान महीने की शुरुआत की बात करें तो इस महीने की शुरुआत चांद को देखने से होती है। रमजान के शुभ अवसर पर लोग सुबह-सुबह उठते हैं और अमन, शांति की कामना करने के बाद सेहरी अर्थात भोर का भोजन करते हैं. इसके बाद वे पूरा दिन लगभग 15 घंटे तक कुछ खाते पीते नहीं है. सूर्य के अस्त होने के बाद इफ्तार का समय आता है जिसमें सभी लोग खजूर और पानी से अपना रोजा खोलते हैं. इस्लाम में माना जाता है कि पैगंबर मोहम्मद अपने समय में रोजा खोलते समय खजूर का सेवन करते थे. खजूर खाने से शारीरिक शक्ति बढ़ती हैं और पाचन क्रिया आसान हो जाती है.

शरीर को जरूरी तत्व जैसे फाइबर, विटामिन, मिनरल आसानी से मिल जाते हैं. खजूर और पानी से रोजा खोलने के बाद शाम की नमाज पढ़ी जाती है. रमजान का पूरा महीना बीतने के बाद अन्त में ईद का त्यौहार आता है जिसे पूरा विश्व अमन, शांति के साथ मनाता है. कुछ लोग इसे मीठी ईद के नाम से भी जानते हैं. मीठी ईद का मतलब जो सबके दिलों में मिठास घोले, जो अपनों में एकता और अखंडता को शक्ति दे. गरीबों के झोली में प्रेम और खुशियों की वर्षा करें. रमजान महीने का मुख्य उद्देश्य खुद को या दूसरों को भूखा रखने से नहीं है बल्कि इसका प्रधान उद्देश्य खुद को आत्मसंयम और धैर्यवान बनाना है. यह महीना अपने बुरे विचारों को त्यागने और अच्छे विचारों को अपनाने का शुभ समय माना जाता है. रमजान का महीना गरीबों के लिए खुशियों का समय होता है क्योंकि इसमें अधिकतम मुस्लिम भाई-बहन गरीब और जरूरतमंदों की मदद करते हैं ताकि गरीब और जरूरतमंद लोग भी ईद के त्यौहार का आनंद ले सके. ईद का त्यौहार मनाने से एक दिन पहले शाम को ईद का चांद देखते हैं।

रमजान का महीने में प्रेम, भाईचारा और एकता के दर्शन

प्रधानाचार्या मुस्लिमा खातून कहा कि इस दिन सभी लोग अपने घरों के छत पर या अन्य जगह पर खड़े होकर चांद के निकलने का इंतजार करते हैं और जब चांद दिख जाता है तब चारों तरफ खुशियां ही खुशियां छा जाती हैं. अधिकतर मुस्लिम भाई लोग पटाखे फोड़ कर इस दिन का स्वागत करते हैं और इसके बाद अगले दिन सुबह लोग स्वच्छ वस्त्र पहनकर इत्र लगते हैं और अपने नजदीक के इर्दगाह, मजार या मस्जिद में जाकर ईद की नमाज पढ़ते हैं और विश्व के अमन शांति की कामना करते हैं. इसी दिन लोग एक दूसरे को गले लगाकर ईद मुबारक बोलते हैं और एक दूसरे को मिठाई भी खिलाते हैं.

इस दिन सभी मुस्लिम परिवार में कुछ खास व्यंजन बनाए जाते हैं जिसमें सेवइयां और खीर मुख्य व्यंजन माना जाता है. बच्चों को आशीर्वाद देने के साथ-साथ उपहार स्वरूप में पैसे या गिफ्ट दिए जाते हैं. इस रमजान के पाक महीने में हमारे भारत के युवाओं को संकल्प लेना होगा कि हम भारत को विकसित भारत बनाने के लिए समय का पल-पल भारत के नाम का देंगे. हम अपने बच्चों को अमन, शांति का पाठ पढ़ाएंगे. विदेशी वस्तुओं की जगह भारतीय वस्तुओं का इस्तेमाल करेंगे. ईद का पावन त्यौहार हमें अपने भीतर के बुराई को मिटाने और समाज में अच्छाई को फैलाने का संदेश देता है।

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