“अंतरराष्ट्रीय योग दिवस” ही स्वास्थ्य और संतुलन का महापर्व – डॉ. फैसल अख्तर

21 जून “अंतरराष्ट्रीय योग दिवस” के अवसर पर सनराइज स्कूल के प्रधानाचार्य डॉ. फैसल अख्तर ने लोगों को योग के महत्व के बारे में बताते हुए कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं बल्कि यह एक ऐसी जीवनशैली है जो मनुष्य के शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करती है. योग की उत्पत्ति भारत में हुई और यह हमारी प्राचीन संस्कृति व परंपरा की अमूल्य धरोहर है.

योग की शक्ति से स्वस्थ जीवन का सपना साकार

प्रधानाचार्य डॉ. फैसल अख्तर ने न्यूज़ ऑफ़ नेशन की टीम को जानकारी देते हुए बताया कि आज के समय में लोगों का जीवन अत्यंत व्यस्त और तनाव पूर्ण हो गया है. विद्यार्थियों पर पढ़ाई का दबाव और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी व डिजिटल उपकरणों के अत्यधिक उपयोग के कारण मानसिक तनाव और शारीरिक समस्याएँ जन्म ले रही हैं. ऐसे में योग एक प्रभावी उपाय के रूप में सामने आता है. प्राणायाम, ध्यान और विभिन्न योगासन शरीर को स्वस्थ एवं सशक्त बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. ताड़ासन, वृक्षासन, भुजंगासन, त्रिकोणासन तथा सूर्य नमस्कार जैसे आसनों का नियमित अभ्यास शरीर को लचीला बनाता है और अनेक रोगों से बचाव करता है.

वहीं प्राणायाम से हमारा श्वसन तंत्र मजबूत होता है तथा शरीर में ऊर्जा का संचार होता है. नियमित योगाभ्यास से तनाव कम होता है, एकाग्रता बढ़ती है और मन को शांति प्राप्त होती है. डॉ. फैसल अख्तर ने आगे बताया कि योग केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है. यह व्यक्ति के नैतिक और मानसिक विकास में भी सहायता करता है. योग हमें अनुशासन, धैर्य, संयम और सकारात्मक सोच की शिक्षा देता है. स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का निवास होता है और स्वस्थ मन ही सफलता की कुंजी है.

योग हमें शारीरिक रूप से मजबूत, मानसिक रूप से शांत बनाता है.

योग केवल बीमारी होने पर करने की चीज नहीं है, बल्कि हमें इसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए. नियमित योगाभ्यास से व्यक्ति के भीतर आत्मनियंत्रण की भावना विकसित होती है, जिससे वह अपने जीवन को सही दिशा में आगे बढ़ा सकता है. यदि विद्यार्थी प्रतिदिन कुछ समय योग और ध्यान के लिए निकालें, तो उनकी स्मरण शक्ति, एकाग्रता और आत्मविश्वास में वृद्धि होगी. इससे वे पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे और जीवन की चुनौतियों का सामना अधिक प्रभावी ढंग से कर पाएंगे. योग हमें शारीरिक रूप से मजबूत, मानसिक रूप से शांत और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बनाता है. इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में योग को अपनाना चाहिए.

प्रधानाचार्य डॉ. फैसल अख्तर ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर बताते हुए कहा कि प्रत्येक वर्ष 21 जून को विश्वभर में योग दिवस मनाया जाता है. इस दिन दुनिया के अनेक देशों में लोग एक साथ योग करते हैं और इसके लाभों को अपनाने का संकल्प लेते हैं. यह भारत के लिए गर्व की बात है कि हमारी प्राचीन योग परंपरा को आज पूरे विश्व ने स्वीकार किया है. योग के माध्यम से भारत ने विश्व को स्वास्थ्य, शांति और सद्भाव का संदेश दिया है. भारत की धरती पर हजारों वर्षों से हमारे ऋषि-मुनि योग का अभ्यास करते आए हैं. योग शब्द संस्कृत के युज धातु से बना हुआ है, जिसका सामान्य अर्थ है – जोड़ना या एकता स्थापित करना. योग मनुष्य को प्रकृति से जोड़ने का कार्य करता है।

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