बस्ती के गणगौर पर्व में दिखा भक्ति और आनंद का वातावरण – मीतू अग्रवाल

गणगौर भारतीय संस्कृति से जुड़ी एक पारंपरिक पर्व है जो विशेष रूप से राजस्थान में मनाया जाता है क्योंकि यहां पर गणगौर का त्यौहार बेहद प्रसिद्ध है. बस्ती जिले में गणगौर का पारंपरिक त्योहार “अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला मंच” के द्वारा पिछले आठ वर्षो से आयोजन कराता आ रहा है. गणगौर त्यौहार को विशेष रूप से महिलाओं के द्वारा बड़े उत्साह, आनंद व श्रद्धा के साथ मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह त्यौहार माता गौरी और भगवान शिव को समर्पित है.

गणगौर का महापर्व सुहाग और सौभाग्य की कामना का पवित्र पर्व

मीडिया से बातचीत करने के दौरान मारवाड़ी महिला मंच की अध्यक्ष मीतू अग्रवाल ने बताया कि गणगौर का पावन त्यौहार होली के दूसरे दिन से शुरू होकर लगभग 16 दिनों तक चलता रहता है. इस दौरान सभी महिलाएं माता गौरी की पूजा-अर्चना करती हैं और वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करती हैं. गणगौर त्यौहार के दिन शादीशुदा महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए और परिवार के खुशहाली के लिए इस दिन व्रत भी रहती हैं. वहीं दूसरे तरफ अविवाहित लड़कियां अच्छे पति की प्राप्ति के लिए गणगौर त्यौहार का हिस्सा बनकर माता पार्वती की पूजा करती हैं. इस त्योहार में सभी महिलाएं अपनी पारंपरिक वेशभूषा में सजती हैं. राजस्थान के पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार गणगौर त्योहार में महिलाएं अपने सिर पर कलश रखकर, गीत या भजन गाते हुए समूह में ईश्वर की पूजा-अर्चना करती हैं.

भारत के कई स्थानों पर गणगौर त्यौहार के पहले महिलाएं मिट्टी या लकड़ी से माता गौरी और भगवान शिव की प्रतिमाएं बनाती है और इन प्रतिमाओं को स्वच्छ, सुंदर वस्त्रो और आभूषणों से सजाया जाता है फिर उन प्रतिमाओं की पूजा की जाती है. कुछ प्रसिद्ध क्षेत्र जैसे – जयपुर उदयपुर जोधपुर और बीकानेर जैसे बड़े शहरों में गणगौर की भव्य व दिव्य शोभायात्राएं निकाली जाती हैं. भारतीय पारंपरिक त्यौहार गणगौर के शोभायात्राओं में भारतीय संस्कृति की झलक में दिखाई देती है क्योंकि इन यात्राओं में विशेष रूप से लोकनृत्य, संगीत और रंग-बिरंगी झांकियां लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है. राजस्थान के जयपुर में विशेष रूप से गणगौर सवारी विश्व में प्रसिद्ध है क्योंकि इसमें राजसी ठाठ – बांट से सजाए हुए हाथी, घोड़े और ऊंट आदि शामिल होते हैं जिस पर लोग सवारी भी करते हैं.

गणगौर का पर्व – भारत में आस्था और परंपरा का दिव्य संगम

गणगौर का त्योहार केवल धार्मिक मान्यताओं तक सीमित नहीं है अपितु यह भारत की संपूर्ण संस्कृति, समृद्धि, लोक कल्याण, पारंपरिक व सामाजिक एकता का भी त्यौहार माना जाता है. इस त्यौहार के दिन सभी लोगों के घर पर विशेष प्रकार के व्यंजन बनाए जाते हैं. सभी लोग एक दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं और एक दूसरे का मुंह भी मीठा कराते हैं. हमारे पूर्वजों के द्वारा शुरू किया गया यह गणगौर जैसी भारतीय परंपरा का त्यौहार आज के आधुनिक युग में हमारे भारत में अभी भी जीवित है. भारत के साथ-साथ विदेशों में रहने वाली भारतीय महिलाएं भी इस त्यौहार को बड़े ही उत्साह और आनंद के साथ मनाती हैं. सोशल मीडिया, समाचार पत्र व डिजिटल माध्यमों के जरिए भी इस त्यौहार का घर बैठे हीआनंद लिया जा सकता है. गणगौर पर्व भारतीय एकता, संस्कृति, प्रेम, अखंडता, समानता और पारिवारिक मूल्यों को भी मजबूती देता है.

बस्ती जिले में यह कार्यक्रम अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला मंच की महिलाओं के द्वारा कराया गया है जिनके नाम – सेक्रेटरी तनुश्री गाड़िया, कोषाध्यक्ष राधा अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष प्रीति डीडवानिया, उपाध्यक्ष नेहा गाड़िया, रिंकी गाड़िया, आकांक्षा अग्रवाल, नम्रता तुलस्यान, ममता गाड़िया, आयुषी, वर्तिका सोनी, ममता, सृष्टि, अर्पिता गोयल, आकांक्षा मोदी अन्य सदस्य शामिल रहे. इस कार्यक्रम के विशेष अवसर पर संस्था की संस्थापिका पूनम गाड़ियां भी मौजूद रही. इस कार्यक्रम में सोनल टेकरीवाल ने गेम्स खेलवाए. अर्पिता, वर्तिका, और आकांक्षा ने पहली एवं गणगौर से संबंधित प्रश्न पूछे. पूनम टेकरीवाल भी उपस्थित रही. इस कार्यक्रम में पारुल, आभा इत्यादि लोगों ने सुंदर नाटक की प्रस्तुति की.

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