चिकित्सा का क्षेत्र केवल एक पेशा नहीं है बल्कि आज के समय में मानवता की सबसे बड़ी सेवा बन चुकी है. आज जहां आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने असंभव लगने वाली बीमारियों के उपचार को संभव बना पाया है, वहीं दूसरी ओर डॉक्टरों की निष्ठा, समर्पण और सेवा भावना ने समाज में उनके प्रति विश्वास को और मजबूत किया है. इसी कड़ी में डॉ. वी. के वर्मा ने कहा कि एक डॉक्टर का वास्तविक उद्देश्य केवल बीमारियों का इलाज करना नहीं बल्कि मरीज को स्वस्थ और सुरक्षित जीवन देना है. उनके अनुसार मरीज के चेहरे पर लौटती खुशी ही किसी भी डॉक्टर की सबसे बड़ी उपलब्धि होती है.
रोगियों के चेहरे पर मुस्कान लौटने की असली वजह डॉक्टरों का समर्पण
डॉ. वी. के वर्मा ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि डॉक्टर बनने की यात्रा अत्यंत कठिन होती है. वर्षों की पढ़ाई, कठोर प्रशिक्षण और निरंतर सीखने की प्रक्रिया के बाद एक चिकित्सक समाज की सेवा करने योग्य बनता है. डॉक्टर का कार्य केवल अस्पताल की चारदीवारी तक सीमित नहीं होता है बल्कि कई बार उन्हें दिन-रात, त्योहार और पारिवारिक जिम्मेदारियों से ऊपर उठकर मरीजों की सेवा करनी पड़ती है. आपातकालीन परिस्थितियों में डॉक्टर बिना किसी भेदभाव के हर मरीज को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं. उनके लिए मरीज की जान बचाना ही सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है.

चिकित्सा क्षेत्र में हर दिन नई चुनौतियां सामने आती हैं इसलिए डॉक्टरों को लगातार अपने ज्ञान और कौशल को अपडेट रखना चाहिए. डॉक्टर केवल इलाज करने वाले विशेषज्ञ नहीं बल्कि समाज के लिए भरोसे और उम्मीद का दूसरा नाम हैं. डॉ. वी. के वर्मा ने आगे कहा कि चिकित्सा सेवा में संवेदनशीलता सबसे महत्वपूर्ण गुण है. मरीज दवा लेने अस्पताल नहीं आता बल्कि वह अपने दर्द, भय और उम्मीदों के साथ डॉक्टर के पास पहुंचता है. ऐसे में डॉक्टर का व्यवहार उस मरीज को मानसिक रूप से मजबूत बनाता है. कई बार डॉक्टर के कुछ प्रेरणादायक शब्द ही मरीज के उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाते हैं.

जीवन के असली रक्षक और हीरो होते हैं – डॉक्टर
डॉ. वी. के वर्मा का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना आवश्यक है. गांवों में रहने वाले लोगों तक गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाना हर चिकित्सक और प्रशासन की साझा जिम्मेदारी है. आधुनिक तकनीक और बेहतर चिकित्सा व्यवस्था के माध्यम से समाज को स्वस्थ और सशक्त बनाया जा सकता है. उन्होंने आगे कोरोना महामारी के मुश्किल दौर को याद करते हुए कहा कि उस समय देशभर के डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने अपने साहस व समर्पण का परिचय दिया था. संक्रमण का खतरा होने के बावजूद भी लाखों मरीजों की सेवा करना और अपने परिवार से दूर रहकर लोगों की जान बचाना चिकित्सा जगत की सबसे बड़ी उदाहरणों में से एक है.

अनेक डॉक्टरों ने अपने प्राणों की आहुति देकर मानव सेवा का ऐसी मिसाल प्रस्तुत की है जिसे आने वाली पीढ़ियां भी सम्मान के साथ याद रखेंगी. डॉ. वी. के वर्मा ने बताया कि समाज को भी डॉक्टरों के प्रति सम्मान और विश्वास बनाए रखना आवश्यक है अस्पतालों में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ सहयोगात्मक व्यवहार करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है. मरीज और डॉक्टर के बीच विश्वास जितना मजबूत होगा, उपचार भी उतना ही प्रभावी और सफल होगा. डॉक्टर का पेशा सम्मान के साथ-साथ एक बड़ी जिम्मेदारी भी है, इसलिए हर चिकित्सक को ईमानदारी, करुणा और नैतिक मूल्यों के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना चाहिए।
शम्भूनाथ गुप्ता पिछले 6 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत हैं. वे ‘मीडिया दस्तक’ और ‘बस्ती चेतना’ जैसे प्लेटफॉर्म्स पर न्यूज़ एवं वीडियो एडिटिंग टीम में अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं दे चुके हैं. न्यूज़ प्रोडक्शन, डिजिटल कंटेंट निर्माण और ग्राउंड रिपोर्टिंग में उन्हें गहरा अनुभव प्राप्त है. इसके साथ ही वे ‘भारतीय बस्ती’ में कंटेंट राइटर के रूप में भी कार्य कर चुके हैं, जहां उन्होंने उत्तर प्रदेश से जुड़ी खबरों के लेखन और डिजिटल प्रकाशन में अहम भूमिका निभाई. वर्तमान में वे ‘न्यूज़ ऑफ नेशन’ में संपादक के पद पर कार्यरत हैं और निष्पक्ष, गंभीर व सटीक पत्रकारिता के माध्यम से समाज से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से सामने ला रहे हैं.


