हमारे भारत में हर साल 1 जुलाई को राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस मनाया जाता है. यह दिन महान चिकित्सा एवं प्रख्यात शिक्षा डॉ. बी. सी. रॉय आपकी जयंती और पुण्यतिथि के उपलक्ष में मनाया जाता है. डॉक्टर दिवस के दिन समाज को स्वस्थ बनाने वाले डॉक्टर के अमूल्य योगदान को याद किया जाता है और उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया जाता है. इस दिवस के अवसर पर बस्ती शहर की प्रतिष्ठित चिकित्सक डॉ. रेनू कनौजिया ने डॉक्टर जगत में नारी की भूमिका के बारे में बताते हुए कहा कि आज चिकित्सा के क्षेत्र में महिलाओं के भागीदारी लगातार बढ़ती जा रही है और वह अपनी प्रतिभा, सेवा व समर्पण से समाज को स्वस्थ बनाने में अपनी भूमिका निभा रही है.
नारी सशक्तिकरण की सबसे मजबूत मिसाल हैं डॉ. रेनू कनौजिया
एमवीएएस मेडिकल कॉलेज, कैली बस्ती में जनरल एवं लेप्रोस्कोपिक सर्जन तथा असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रेनू कनौजिया ने न्यूज़ ऑफ़ नेशन नेटवर्क की टीम को जानकारी देते हुए बताया कि एक समय था जब चिकित्सा के क्षेत्र को पुरुषों का पेशा माना जाता था लेकिन आज की परिस्थितियां पूरी तरह से बदल चुकी हैं. आज के समय में मेडिकल कॉलेज में अधिक संख्या में छात्राएं प्रवेश ले रही हैं और कई संस्थानों में उनकी संख्या 50 प्रतिशत से भी अधिक हो चुकी है. यह परिवर्तन इस बात का प्रमाण है कि महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी योग्यता और क्षमता का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं.

उन्होंने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी केवल उनके व्यक्तिगत विकास का प्रतीक नहीं है बल्कि यह समाज में नारी सशक्तिकरण की मजबूत तस्वीर भी प्रस्तुत करती है. उन्होंने आगे कहा कि महिला डॉक्टर केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं रही बल्कि वह ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य जागरूकता फैलाने, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुधारने, टीकाकरण अभियान चलाने और महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं. उनके द्वारा किए हुए प्रयासों से समाज में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ी है और अनेक गंभीर बीमारियों की रोकथाम संभव हो पाया है.
महिला डॉक्टर बदल रही हैं स्वास्थ्य व्यवस्था की तस्वीर
डॉ. रेनू कनौजिया ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि महिला रोगियों के लिए महिला डॉक्टर का होना किसी ईश्वरीय वरदान से कम नहीं है. महिला रोगियों में विशेष रूप से स्त्री रोग, गर्भावस्था और महिलाओं से संबंधित समस्याओं के दौरान मैरिज महिला डॉक्टर के सामने अधिक सहज महसूस करती है. महिला मरीज बिना किसी झिझक के महिला डॉक्टर के सामने अपनी समस्याएं खुलकर बता पाती है जिससे सही समय पर उचित उपचार संभव हो जाता है. हमारे परिवार में महिलाओं के स्वास्थ्य सुरक्षा किसी भी समाज की प्रगति के लिए महत्वपूर्ण आधार माना जाता है और इसमें महिला चिकित्सकों की काफी अधिक भूमिका होती है. डॉ. रेनू कनौजिया ने कोरोना महामारी के मुश्किल समय को याद करते हुए कहा कि कोरोना काल के समय में महिला डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों ने जिस साहस और सेवा भावना का परिचय दिया है वह पूरे देश के लिए प्रेरणादायक है.

उस समय कोविड का संक्रमण काफी अधिक था लेकिन हमारे डॉक्टरों ने अपने कर्तव्य को सर्वोपरी रखते हुए दिन रात अपने परिवार से अलग रहकर अस्पतालों में मरीजों की सेवा की. यह हमारे नारी समाज के शक्ति, साहस और कर्तव्यनिष्ठा का जीवंत उदाहरण है जिसको पूरा देश कभी भूल नहीं सकता. उन्होंने आगे कहा कि डॉक्टरों की जिम्मेदारी केवल मरीज का इलाज करना नहीं करना नहीं बल्कि परिवार और समाज को स्वस्थ जीवन शैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है. रेनू कनौजिया ने सभी युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि यदि आपके भीतर सेवा का भाव, मेहनत करने का जज्बा और समाज के लिए कुछ नया करने की इच्छा हो तो हमें निडर होकर चिकित्सा क्षेत्र को भी चुनना चाहिए. डॉक्टर बनना एक्स व्यापारिक पेशा नहीं है बल्कि मानवता की सेवा करने का सबसे बड़ा अवसर है. जब कोई व्यक्ति डॉक्टर बनता है तो वह केवल अपने परिवार का ही नहीं बल्कि पूरे समाज का भविष्य सुरक्षित और स्वस्थ बनाने का प्रयास करता है।
शम्भूनाथ गुप्ता पिछले 6 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत हैं. वे ‘मीडिया दस्तक’ और ‘बस्ती चेतना’ जैसे प्लेटफॉर्म्स पर न्यूज़ एवं वीडियो एडिटिंग टीम में अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं दे चुके हैं. न्यूज़ प्रोडक्शन, डिजिटल कंटेंट निर्माण और ग्राउंड रिपोर्टिंग में उन्हें गहरा अनुभव प्राप्त है. इसके साथ ही वे ‘भारतीय बस्ती’ में कंटेंट राइटर के रूप में भी कार्य कर चुके हैं, जहां उन्होंने उत्तर प्रदेश से जुड़ी खबरों के लेखन और डिजिटल प्रकाशन में अहम भूमिका निभाई. वर्तमान में वे ‘न्यूज़ ऑफ नेशन’ में संपादक के पद पर कार्यरत हैं और निष्पक्ष, गंभीर व सटीक पत्रकारिता के माध्यम से समाज से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से सामने ला रहे हैं.


