डॉक्टरों की सेवा से सुरक्षित है समाज का स्वास्थ्य – डॉ. सत्यम पांडेय

राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर अर्चना हॉस्पिटल के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. सत्यम पांडेय ने सभी डॉक्टरों और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि डॉक्टर का पेशा केवल जीविका चलाने का साधन नहीं है बल्कि मानवता की सेवा करने का सबसे पवित्र माध्यम है. उन्होंने कहा कि प्रत्येक चिकित्सक का प्रथम और अंतिम लक्ष्य मरीज को बेहतर स्वास्थ्य, नई उम्मीद और सुरक्षित जीवन प्रदान करना होना चाहिए.

मरीज को बेहतर स्वास्थ्य, नई उम्मीद और सुरक्षित जीवन प्रदान करना ही लक्ष्य

क्रिटिकल केयर एवं पेन मेडिसिन के स्पेशलिस्ट डॉ. सत्यम पांडेय ने न्यूज आफ नेशन नेटवर्क की टीम को जानकारी देते हुए बताया कि एक सफल डॉक्टर बनने के पीछे वर्षों की कठिन मेहनत, अनुशासित जीवन, निरंतर अध्ययन और संघर्ष छिपा होता है. मेडिकल शिक्षा से लेकर अस्पतालों में प्रशिक्षण तक, हर चरण चिकित्सक को केवल ज्ञान ही नहीं बल्कि धैर्य, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी भी सिखाता है. इसी कारण समाज डॉक्टरों को अत्यंत सम्मान की दृष्टि से देखता है. राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस का यह दिन उन सभी चिकित्सकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर भी होता है जो दिन-रात बिना किसी भेदभाव के समाज की सेवा करनते रहते हैं.

चाहे इमरजेंसी हो, प्राकृतिक आपदा हो या कोई महामारी, डॉक्टर हर परिस्थिति में अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करते हैं. उन्होंने आगे कहा कि डॉक्टर का दायित्व केवल दवा लिखने तक सीमित नहीं होता है. एक अच्छा चिकित्सक मरीज की शारीरिक बीमारी के साथ-साथ उसकी मानसिक स्थिति को भी समझता है और कई बार डॉक्टर के अच्छे शब्द ही उस मरीज को कठिन परिस्थितियों से लड़ने की शक्ति प्रदान करते हैं. आज चिकित्सा विज्ञान के विकास से उपचार के नए आयाम स्थापित रहे हैं लेकिन डॉक्टर और मरीज के बीच विश्वास का रिश्ता आज भी पहले से अधिक मजबूत है. जब मरीज अपने चिकित्सक पर विश्वास करता है और डॉक्टर पूरी निष्ठा के साथ उपचार करता है, तब बेहतर परिणाम सामने आते हैं.

समाज के रक्षकों को शत-शत नमन – डॉ. सत्यम पांडेय

डॉ. सत्यम पांडेय ने अंतर्राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस पर कोरोना महामारी के समय को याद करते हुए कहा कि उस समय हमारे डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने अपने जीवन की परवाह किए बिना लाखों लोगों की जान बचाने का प्रयास किया है. संक्रमण के खतरे के बीच लगातार काम करते रहना, परिवार से दूर रहना और सीमित संसाधनों में भी मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराना चिकित्सा समुदाय की अद्भुत सेवा भावना का प्रमाण है. उन्होंने समाज से भी अपील करते हुए कहा कि हमें डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों का सम्मान करना चाहिए तथा अस्पतालों में उनके साथ सहयोगपूर्ण व्यवहार करना चाहिए.

एक स्वस्थ समाज का निर्माण तभी संभव हो सकता है जब नागरिक और चिकित्सा समुदाय आपसी विश्वास और सम्मान के साथ मिलकर कार्य करें. उन्होंने सभी नागरिकों से आह्वान करते हुए कहा कि यदि वे चिकित्सा क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं तो केवल सफलता और प्रतिष्ठा के लिए इस क्षेत्र में न आए, बल्कि सेवा, करुणा और मानवता की भावना के साथ इस पेशे को अपनाएं. डॉक्टर का वास्तविक सम्मान उसकी डिग्री या पद से नहीं की जाती बल्कि उसके व्यवहार, ईमानदारी और मरीजों के प्रति समर्पण से तय होता है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top