भारत की सभ्यता, संस्कृति, नैतिकता और आदर्श के प्रतीक भगवान राम – हर्षित गुप्ता

रंजीवन ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर हर्षित गुप्ता ने भारत के सभी युवाओं को रामनवमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज पूरा भारतवर्ष रामनवमी के रंग में रंगा हुआ है. भगवान राम ही भारत की आस्था के आधार माने जाते हैं. भगवान राम केवल पूजा के पात्र नहीं है बल्कि उस विचारधारा का साकार प्रतिबिंब है जिसमें भारत की मर्यादा टिकी हुई है. भारत की सभ्यता, संस्कृति, नैतिकता और आदर्श केवल भगवान राम के चरित्र में देखा जा सकता है.

भगवान राम ही हमारे भारत की चेतना और चिंतन है.

डायरेक्टर हर्षित गुप्ता ने मीडिया से बातचीत करने के दौरान बताया कि हमारे विचारों में भगवान राम का स्थान केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है बल्कि वे एक धार्मिक और मर्यादित पुरुष है जो मानव जीवन के हर एक क्षण में गहराई से समाए हुए हैं. भगवान राम ही हम युवाओं के जीवन के आदर्श है और वही हमारे जीवन का मार्गदर्शन करते हैं. भगवान राम ही हमारे भारत की चेतना और चिंतन है क्योंकि हम भारतीयों की सोच और हमारा निर्णय भगवान राम के आदर्शों से ही प्रेरित होता है. सत्य, धर्म, त्याग, कर्तव्य, अनुशासन, आदर्श, मर्यादा का एकमात्र उदाहरण केवल भगवान राम है. हमारे भीतर ऊर्जा का संचार और जागृत चेतना का प्रतीक भी भगवान राम ही हैं. भगवान राम के चरित्र में यह भी देखा गया है कि वे किसी समुदाय या वर्ग तक सीमित नहीं है.

कौशल्या नंदन श्री राम ने जिस प्रकार अपने जीवन में न्याय, समानता और करूणा का जीवन जिया – वह हम युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है. भगवान राम सिर्फ हमारे नहीं है बल्कि वे सभी लोगों के अपने हैं, चाहे वह किसी भी देश, जाति, धर्म, समुदाय, वर्ग विषेश से संबंधित हो. भगवान राम ने अपने जीवन में सत्य और धर्म का पालन किया. चाहे उन्हें राज-पाठ त्याग कर वनवास जाना हो या प्रजा के हित में कठिन निर्णय लेने हो. भगवान राम ने अपने व्यक्तिगत सुख को पीछे रखकर अपने मानव कर्तव्य को आगे रखा. उन्होंने अपने माता-पिता, पत्नी और गुरु का सम्मान किया और उनकी आज्ञा का पालन किया उनकी यह बात हमें इस बात के लिए प्रेरित करती है हमें भी अपने परिवार, गुरु और समाज के प्रति सम्मान की भावना रखनी चाहिए.

भव्य राम मंदिर हजारों वर्षों के त्याग, तपस्या, बलिदान का साकार प्रतिबिंब है.

भगवान राम के चरित्र दर्शन में उनके भाइयों के प्रति असीम प्रेम, एकता, समर्पण और त्याग का उदाहरण मिलता है. भगवान राम एक आदर्श पति भी माने जाते हैं क्योंकि उन्होंने अपना जीवन में सीता के संग समर्पित कर दिया. भगवान राम ने लंका पति रावण का वध करके सभी ऋषि-मुनियों को भय मुक्त किया और विभीषण को लंका का राजा बनाकर अपनी मित्रता को भी निभाया. भगवान राम का अयोध्या में राज्याभिषेक होने के बाद जब उन्होंने न्याय और जनकल्याण को प्राथमिकता दी तभी राम राज्य की स्थापना हो गई. चारों ओर अयोध्या का वातावरण आनंद, सुरक्षित और सुखमय हो गया. आज के जमाने में हर व्यक्ति किसी न किसी प्रभाव के कारण तनाव ग्रस्त है इस तनाव के समय में भगवान राम ही हमारे जीवन का मार्गदर्शन कर सकते हैं.

भगवान राम का जीवन हमें यह भी सीखता है कि हमें अपनी शक्ति का प्रयोग शांति की स्थापना के लिए करनी चाहिए और धन का उपयोग दान करने के लिए किया जाना चाहिए. भगवान राम के जीवन को देखते हुए हम भारत के युवाओं को संकल्प लेना होगा कि हम अपने भारतीय समाज को एकता और सामाजिक शांति का पाठ पढ़ाएंगे और उस पथ चलने के लिए प्रेरित भी करेंगे. भगवान राम के जन्म स्थल पर बना भव्य राम मंदिर भारत की एकता, संस्कृति, सभ्यता, विरासत और हजारों वर्षों के त्याग, तपस्या, बलिदान का साकार प्रतिबिंब है। कार सेवकों के बलिदान ने ही राम मंदिर के संघर्ष को सिद्धि में परिवर्तित किया. भगवान राम का नाम केवल एक शब्द नहीं है बल्कि मानव जीवन को सही और शांति के रास्ते पर ले जाने का मंत्र है।

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