होटल प्रकाश के ओनर स्कंद गिरोत्रा बस्ती सहित पूरे भारत को होली की बधाई देते हुए कहा कि आज की होली केवल रंगों का मिलन नहीं बल्कि एक दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना भी सीखता है. होली सनातन धर्म का त्यौहार होने के साथ-साथ प्रेम और भाईचारे का भी त्यौहार है. होली का पहला दिन होलिका दहन के रूप में मनाया जाता है. होलिका दहन दिवस को हिंदुओं का पवित्र त्योहार माना जाता है. यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है.
रंगों के साथ भावनाओं के सम्मान का भी त्यौहार
स्कंद गिरोत्रा ने मीडिया को बताया इसी दिन सभी लोग लकड़ी उपयोग से चिता जैसी विशाल संरचना बनाकर उसमें अग्नि जलाते हैं और उसकी पूजा-अर्चना करते हैं. होलिका दहन की वास्तविक कथा की बात की जाए तो इसका संबंध भगवान विष्णु के भक्त प्रहलाद और उनकी होलिका बुआ संबंधित है. उनके पिता हिरण्यकश्पयू खुद को भगवान मानते थे और सभी लोगों से अपनी पूजा करवाता था. परंतु उनका पुत्र ये बात मानने को तैयार नहीं था. प्रहलाद केवल नारायण की ही पूजा करता थे. हिरण्यकश्पयू को यह बात अच्छी ना लगी और उसने अपनी बहन होलिका को बुलाया और उसे स्वतंत्रतापूर्वक आदेश दिया कि वह प्रहलाद को लेकर जलते हुए अग्नि में बैठ जाएं. होलिका ने ठीक ऐसा ही किया क्योंकि उसे भगवान ब्रह्मा से अग्नि में ना जलने का वरदान प्राप्त था.
इस प्रकार होलिका प्रहलाद के साथ जलते हुए अग्नि में बैठ गई और जब आग लगाई गई तब भगवान विष्णु की कृपा से भक्त प्रहलाद को कुछ भी नहीं हुआ और होलिका जलकर राख हो गई. इस धार्मिक घटना से हमें यह संदेश मिलता है कि सच्चाई और अच्छाई की सदैव विजय ही होती है. भक्ति की शक्ति की जीत का यह सबसे बड़ा मिसाल माना जाता है. जब रात के समय होलिका का दहन किया जाता है. तो वह केवल लकड़ियों का ही दहन नहीं होता बल्कि अपने मन के भीतर छिपे हुए बुराइयों का दहन होता है. मन में छिपे हुए नकारात्मक में विचारों का दहन करने का ये शुभ समय माना जाता है. इस दिन गांव, शहर में सभी लोग भाषा, जाति के भेदभाव को भूलकर एक स्थान पर इकट्ठा होते हैं और दूसरो को सुनहरे भविष्य की शुभकामनाएं भी देते हैं. इससे हमारी आपसी संबंध मजबूत होते हैं और हमारे संस्कार को एक नई ऊंचाई मिलती है.

प्रेम तथा भाईचारे का संदेश होली का त्यौहार
स्कंद गिरोत्रा ने कहा होलिका दहन के धार्मिक महत्व की बात की जाए तो इस दिन सभी लोग अग्नि की चारों परिक्रमा करते हैं, अग्नि को गेहूं की बलिया और नारियल समर्पित करते हैं. इसका विशेष मान्यता यह है कि ये सब करने से हमारे भीतर की नकारात्मक ऊर्जा, रोग, दोष, कष्ट परेशानी दूर हो जाते हैं. इतना ही नहीं बल्कि फागुन महीने की होली के समय ही ग्रामीण इलाकों में नई फसल की खुशहाली का विधि पूर्वक अनुष्ठान भी कराया जाता है. ये पावन पर्व हमे सीखता है कि अन्याय अत्याचार, छल, कपट, झूठ अस्थायी होते हैं और इनका अंत निश्चित होता है. ये महापर्व भारतीय समाज को नैतिकता और सत्य के राह पर चलने का धार्मिक संदेश देता है.
जब कोई व्यक्ति होलिका दहन की इस पावन कथा को सुनता है और उसको समझना है तो उसके भीतर मानवीय गुणो का संचार होता है. इसके बाद सुबह सब लोग उठकर भगवान की पूजा वंदना करके सभी लोग एक दूसरे को रंग लगाते हैं. मिठाई खिलाते हैं और एक दूसरे को गले लगाते हैं. यही वास्तविक होली की पहचान है. रासायनिक रंगों का प्रयोग ना करें बल्कि होली के दिन हमें फूलों की होली विशेष रूप से खेलनी चाहिए क्योंकि फूलों की होली प्राकृतिक होली का उदाहरण माना जाता है. होली आपके जीवन में नई उम्मीदो की किरण लेकर आए, आपके भीतर नयी ऊर्जा का संचार करें।
शम्भूनाथ गुप्ता पिछले 6 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत हैं. वे ‘मीडिया दस्तक’ और ‘बस्ती चेतना’ जैसे प्लेटफॉर्म्स पर न्यूज़ एवं वीडियो एडिटिंग टीम में अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं दे चुके हैं. न्यूज़ प्रोडक्शन, डिजिटल कंटेंट निर्माण और ग्राउंड रिपोर्टिंग में उन्हें गहरा अनुभव प्राप्त है. इसके साथ ही वे ‘भारतीय बस्ती’ में कंटेंट राइटर के रूप में भी कार्य कर चुके हैं, जहां उन्होंने उत्तर प्रदेश से जुड़ी खबरों के लेखन और डिजिटल प्रकाशन में अहम भूमिका निभाई. वर्तमान में वे ‘न्यूज़ ऑफ नेशन’ में संपादक के पद पर कार्यरत हैं और निष्पक्ष, गंभीर व सटीक पत्रकारिता के माध्यम से समाज से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से सामने ला रहे हैं.


