15 अगस्त के पावन अवसर पर रानी श्रीवास्तव ने देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारत की स्वतंत्रता केवल हमारे लिए गर्व का विषय नहीं है बल्कि हमारे महान स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, संघर्ष और बलिदान की अमूल्य विरासत है. उन्होंने कहा कि आजादी का वास्तविक अर्थ तभी सार्थक होगा, जब हम देश की एकता, अखंडता, सामाजिक समरसता और आपसी भाईचारे को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास करेंगे. रानी श्रीवास्तव ने अपनी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के दम पर सोशल मीडिया की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है.
देश की एकता और अखंडता के लिए मिलकर करें प्रयास
रानी श्रीवास्तव ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि भारत विविधताओं का देश है. यहां अलग-अलग भाषाएं, संस्कृतियां, परंपराएं, पहनावे और जीवनशैलियां देखने को मिलती हैं लेकिन इन विविधताओं के बावजूद भारतीय होने की भावना हम सभी को एक सूत्र में बांधती है. यही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है. देश की एकता केवल सरकार या किसी एक वर्ग की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्र से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को प्राथमिकता दे. रानी श्रीवास्तव ने विशेष रूप से नारी शक्ति की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत की प्रगति और एकता में महिलाओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है.

इतिहास के पन्नों में अनेक ऐसी वीरांगनाओं का उल्लेख मिलता है, जिन्होंने देश की स्वतंत्रता और सम्मान के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया. रानी लक्ष्मीबाई से लेकर सरोजिनी नायडू तक, भारतीय महिलाओं ने साहस, नेतृत्व और राष्ट्रभक्ति की अद्भुत मिसाल पेश की है. आज की नारी केवल परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं है. महिलाएं शिक्षा, चिकित्सा, प्रशासन, राजनीति, विज्ञान, सेना, उद्योग और सामाजिक सेवा सहित हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं. जब एक महिला शिक्षित और आत्मनिर्भर बनती है तो उसका प्रभाव केवल उसके जीवन तक सीमित नहीं रहता है बल्कि पूरा परिवार और समाज उससे प्रेरणा प्राप्त करता है. महिलाओं को सशक्त बनाना वास्तव में राष्ट्र को मजबूत बनाना है.

आजादी का असली अर्थ राष्ट्र की एकता और सामाजिक समरसता को मजबूत करना
एक शिक्षित मां अपने बच्चों में संस्कार, जिम्मेदारी, देशप्रेम और सामाजिक मूल्यों की भावना विकसित कर सकती है इसलिए नारी शिक्षा को बढ़ावा देना और महिलाओं को समान अवसर प्रदान करना देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए आवश्यक है. भारत की एकता को मजबूत करने में महिलाओं की भूमिका केवल परिवार तक सीमित नहीं होनी चाहिए. महिलाएं समाज में सकारात्मक सोच, सद्भाव और जागरूकता फैलाने की महत्वपूर्ण वाहक बन सकती हैं. आज आवश्यकता है कि बेटियों को समान शिक्षा, सम्मान और अवसर दिए जाएं ताकि वे अपनी क्षमता के अनुरूप देश के विकास में योगदान दे सकें. रानी श्रीवास्तव ने युवाओं से भी आह्वान किया कि वे स्वतंत्रता दिवस को केवल ध्वजारोहण और राष्ट्रगान तक सीमित न रखें बल्कि इस दिन राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का संकल्प लें.

देशभक्ति का अर्थ केवल देश के लिए बड़े कार्य करना नहीं, बल्कि ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का पालन करना, कानून का सम्मान करना, स्वच्छता बनाए रखना, जरूरतमंदों की सहायता करना और समाज में भाईचारा कायम रखना भी है. आज भारत तेजी से विकास की ओर बढ़ रहा है. ऐसे समय में देश की एकता और सामाजिक सद्भाव को बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है. यदि महिलाएं, युवा और समाज के प्रत्येक वर्ग मिलकर राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं, तो भारत को विश्व के अग्रणी देशों की पंक्ति में पहुंचने से कोई नहीं रोक सकता. स्वतंत्रता दिवस पर हम सभी मिलकर भारत की एकता, अखंडता और गौरव को मजबूत करने का संकल्प लेना चाहिए. अंत में उन्होंने सभी देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राष्ट्रहित में हमारा योगदान ही सच्चे अर्थों में स्वतंत्रता का उत्सव है।
शम्भूनाथ गुप्ता पिछले 6 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत हैं. वे ‘मीडिया दस्तक’ और ‘बस्ती चेतना’ जैसे प्लेटफॉर्म्स पर न्यूज़ एवं वीडियो एडिटिंग टीम में अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं दे चुके हैं. न्यूज़ प्रोडक्शन, डिजिटल कंटेंट निर्माण और ग्राउंड रिपोर्टिंग में उन्हें गहरा अनुभव प्राप्त है. इसके साथ ही वे ‘भारतीय बस्ती’ में कंटेंट राइटर के रूप में भी कार्य कर चुके हैं, जहां उन्होंने उत्तर प्रदेश से जुड़ी खबरों के लेखन और डिजिटल प्रकाशन में अहम भूमिका निभाई. वर्तमान में वे ‘न्यूज़ ऑफ नेशन’ में संपादक के पद पर कार्यरत हैं और निष्पक्ष, गंभीर व सटीक पत्रकारिता के माध्यम से समाज से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से सामने ला रहे हैं.


