योग मन और व्यवहार को संतुलित करने वाली वैज्ञानिक जीवनशैली – ओम प्रकाश आर्य

आज के समय में आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की प्रगति के कारण मनुष्य की औसत आयु पहले की अपेक्षा काफी अधिक बढ़ चुकी है. हालांकि ये भी सच है कि केवल लंबा जीवन जीना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्वस्थ और सक्रिय जीवन जीना भी उतना ही आवश्यक है. इसी उद्देश्य को लेकर बस्ती में आयोजित एक प्रेस वार्ता में भारत स्वाभिमान समिति, बस्ती के जिला प्रभारी ओम प्रकाश आर्य ने “योगा फॉर हेल्दी एजिंग” विषय पर विस्तार से अपने विचार व्यक्त किया.

योगा फॉर हेल्दी एजिंग पर विचार विमर्श

ओम प्रकाश आर्य ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान समय में दुनिया भर में वृद्धजनों की आबादी तेजी से बढ़ रही है. ऐसे में यह आवश्यक है कि लोग केवल लंबी आयु प्राप्त करने के बजाय स्वस्थ वृद्धावस्था की दिशा में विशेष रूप से ध्यान दें. योग व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाता है, जिससे व्यक्ति की गुणवत्ता में सुधार होता है. योग केवल एक शारीरिक व्यायाम नहीं होता बल्कि शरीर, मन और व्यवहार को संतुलित करने वाली वैज्ञानिक जीवनशैली है, जो बढ़ती उम्र में स्वास्थ्य और ऊर्जा बनाए रखने का प्रभावी माध्यम होती है. बढ़ती उम्र के साथ गिरने और चोट लगने का खतरा अधिक बढ़ जाता है.

योग के विभिन्न संतुलन आधारित अभ्यास शरीर की स्थिरता बढ़ाते हैं और व्यक्ति को अधिक आत्मविश्वास के साथ चलने-फिरने में मदद करते हैं. नियमित योगाभ्यास से जोड़ों की जकड़न कम होती है और शरीर का लचीलापन बना रहता है. गठिया जैसी समस्याओं से पीड़ित लोगों को भी योग से लाभ मिल सकता है. आगे उन्होंने गैर-संचारी रोगों पर भी विस्तार से चर्चा की और कहा कि मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और मोटापा जैसी बीमारियां आज बड़ी चुनौती बन चुकी हैं. अनेक अध्ययनों में यह पाया गया कि नियमित योगाभ्यास इन रोगों के नियंत्रण और प्रबंधन में सहायक होता है. योग शरीर की कार्यप्रणाली को संतुलित बनाता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत रखता है.

नियमित ध्यान करने से एकाग्रता और सकारात्मक सोच विकसित होती है.

वर्तमान समय के लोगो में तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. ध्यान और प्राणायाम जैसे योगिक अभ्यास मन को शांत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. नियमित ध्यान करने से मानसिक स्पष्टता, एकाग्रता और सकारात्मक सोच विकसित होती है. इससे वृद्धजन स्वयं को अधिक ऊर्जावान और आत्मनिर्भर महसूस करते हैं. उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों और मांसपेशियों की मजबूती कम होने लगती है. ऐसे में योग शरीर को सक्रिय बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. नियमित योग से मांसपेशियों की शक्ति बढ़ती है, शरीर में संतुलन बना रहता है और दैनिक कार्यों को करने की क्षमता में सुधार होता है. श्वसन स्वास्थ्य पर जोडर देते हुए कहा कि प्राणायाम और गहरी श्वास के अभ्यास फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ाते हैं तथा शरीर को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन उपलब्ध कराते हैं.

इससे न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होता है बल्कि मानसिक शांति और ऊर्जा का स्तर भी बढ़ता है. योग पाचन तंत्र को बेहतर बनाने, मेटाबॉलिज्म को सक्रिय रखने और शरीर की समग्र कार्यक्षमता को बढ़ाने में भी सहायक है. यही कारण है कि आज विश्वभर में योग को एक प्रभावी और वैज्ञानिक स्वास्थ्य पद्धति के रूप में स्वीकार किया जा रहा है. ओम प्रकाश आर्य ने सभी भारतीयों से अपील करते हुए कहा कि योग को केवल 21 जून के (अंतरराष्ट्रीय योग दिवस) तक सीमित न रखा जाए बल्कि योग को वर्ष के 365 दिनों तक अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए. यदि प्रत्येक व्यक्ति प्रतिदिन कुछ समय योग, प्राणायाम और ध्यान को दे, तो वह न केवल स्वस्थ जीवन जी सकता है बल्कि वृद्धावस्था में भी सक्रिय, आत्मनिर्भर और खुशहाल रह सकता है।

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