भाजपा नेत्री रोली सिंह ने इजरायल और ईरान के बीच होने वाले युद्ध पर अपना विचार प्रस्तुत करते हुए कहा कि ईरान और इजरायल के युद्ध के पीछे कई ऐतिहासिक और राजनीतिक रहस्य छिपे हैं. पश्चिम एशिया शुरू से ही भूमि तनाव का केंद्र रहा है परंतु वर्तमान समय में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ गया है.
पश्चिम एशिया की अर्थव्यवस्था पर युद्ध का प्रभाव
पिछले कुछ सालों से ईरान और इजरायल के मध्य सैन्य टकराव बढ़ते जा रहे हैं इसी विवाद ने पूरे विश्व की चिंता को बढ़ा दिया है. इसराइल कई दशकों से ईरान के परमाणु परीक्षण को खतरा मानते आया है और इजरायल यह भी आरोप लगता है कि ईरान अपने घर में परमाणु रूपी हथियार विकसित कर रहा है. इतना ही नहीं बल्कि दोनों देशों के बीच में वैचारिक और राजनीतिक व्यवहार भी इसी युद्ध का मुख्य कारण है क्योंकि इजरायल हमेशा ईरान को अवैध देश की मान्यता देता है. वर्तमान सत्र 2026 की बात करें तो इसी साल में इजराइल और उसके सहयोगियों के द्वारा ईरान के सैन्य और परमाणु ठिकानों पर हमला करने से स्थिति और भी गंभीर होती जा रही है जिससे क्षेत्रीय युद्ध की आशंका बढ़ चुकी हैं और अब यह तनाव युद्ध का रुप ले चुका है.

ऑपरेशन लायन के तहत हमला करने के बाद दोनों देशों के बीच लड़ाई पहले से अधिक तेज हो चुका है. इस युद्ध का प्रभाव पश्चिम एशिया के साथ-साथ पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था को गिराता जा रहा है. इतना ही नहीं बल्कि इस युद्ध का नकारात्मक असर अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ रहा है. इस युद्ध का सबसे अधिक प्रभाव वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दिखाई दे रहा है क्योंकि दुनिया का लगभग 25% तेल और 20% गैस की आपूर्ति ईरान से ही होती है. ये ऊर्जा भंडार strait of Hormuz नामक समुद्री मार्गो से आयात किए जाते हैं. युद्ध बढ़ने के कारण इन समुद्री मार्गों से तेल और गैस की आपूर्ति होने में बाधा उत्पन्न हो रही है.
वासुदेव कुटुंबकम ही भारत का विचार, शांति और संवाद का समर्थन
तेल और गैस की आपूर्ति के कारण इनकी कीमतों में वृद्धि हो चुकी है जो वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रही है. इजरायल और ईरान के के युद्ध के कारण विकसित और विकासशील देश की महंगाई बढ़ गई, व्यापारी मार्ग बाधित हो चुके, वैश्विक ऊर्जा व्यापार खतरे में है. इसके अलावा इसी युद्ध ने मानव जीवन को भी संकट में ला दिया है क्योंकि जिन क्षेत्रों में युद्ध हो रहे हैं वहां पर सारे रोजगार बंद कर दिए जा रहे हैं. नागरिकों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर विस्थापित होना पड़ रहा है. मानव जीवन की बुनियादी सुविधा और सुरक्षा का खतरा भी बढ़ता जा रहा है. इजरायल और ईरान के युद्ध ने भारत के लिए भी नई चुनौतियां लेकर आया हैं क्योंकि भारत का तेल और गैस जैसी ऊर्जा भंडार के साधन पश्चिम एशिया से ही आयात किए जाते हैं.

युद्ध के कारण भारत के ऊर्जा भंडारों में पूर्ति की बाधा उत्पन्न हो रही है इन्हीं बधाओ के कारण भारत की ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो रही है. इस युद्ध में भारत की भूमिका की बात की जाए तो भारत शुरू से ही पूरे विश्व को अपना परिवार मानते आया है क्योंकि वासुदेव कुटुंबकम ही भारत का विचार है. इसी विचार की वजह से इजरायल और ईरान से भारत का संबंध काफी अच्छा है. इजरायल के बात करें तो ये भारत का रक्षा सहयोगी है जो भारत को अपने सैनिक सुरक्षा, ड्रोन और मिसाइल भी प्रदान करता है. ईरान की बात की जाए तो ईरान भारत के ऊर्जा भंडार की आपूर्ति करता है. दोनों देशों से अच्छे संबंध होने के कारण भारत किसी का समर्थन न करने के बजाय शांति और संवाद का समर्थन कर रहा है. अगर भविष्य में युद्ध बढ़ता है तो इसका नकारात्मक प्रभाव विश्व की अर्थव्यवस्था, वैश्विक राजनीति, ऊर्जा भंडारों की कमी के रूप में देखने को मिल सकता है।


