उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक की डिप्टी मैनेजर प्रिंसी पाल ने भारत के सभी सनातनियों को नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हिंदुओं का पावन त्यौहार नवरात्रि आ चुका है चारों तरफ खुशियां ही खुशियां दिखाई दे रही है . अब चारों तरफ लोग मां दुर्गा की भक्ति में लीन रहेंगे. नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा होती है. हमारा भारत वर्ष नवरात्रि के अंतिम दिन नवमी को ही रामनवमी के रूप में मानता है. रामनवमी हिंदुओं का पवित्र और मनोरम त्योहार माना जाता है क्योंकि इसी दिन भगवान राम ने महाराजा दशरथ के यहां जन्म लिया था.
भगवान राम ने पत्नीव्रता पति के रूप में अपना जीवन व्यतीत किया.
मीडिया से बातचीत करते हुए प्रिंसी पाल ने कहा कि भगवान राम को ही मर्यादा पुरुषोत्तम राम कहा जाता है क्योंकि भगवान राम ने अपने जीवन में सत्य, धर्म, न्याय, अनुशासित पुत्र और पत्नीव्रता पति के रूप में अपना जीवन व्यतीत किया. हिंदू पंचांग के अनुसार यह त्यौहार हर साल चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि का मनाया जाता है. यह दिन हिंदू पंचांग के अनुसार पूरे सृष्टि के लिए शुभ माना जाता है. भगवान राम का जन्म त्रेतायुग में अखंड भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के अयोध्या की पुण्य भूमि पर हुआ था. इनके पिता राजा दशरथ और उनकी माता कौशल्या हमेशा भगवान विष्णु की भक्ति में लीन रहते थे. राजा दशरथ की दो और रानियां थी जिनके नाम कैकई और सुमित्रा था. भगवान राम अपने तीनों माताओ को समानता की नजर से देखते थे. भगवान राम के तीन भाई थे जिनका नाम लक्ष्मण, भारत और शत्रुघ्न था. भगवान राम ही रामायण के प्रमुख नायक माने जाते हैं रामायण में विशेष रूप से भगवान राम की मर्यादा, उनके जीवन संघर्ष का विस्तार वर्णन मिलता है.

रामनवमी के दिन सभी धार्मिक स्थलों में पूजा अर्चना की जाती है और सभी धार्मिक स्थलों में कुछ ना कुछ कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. सभी राम भक्त सुबह जल्दी उठकर भगवान राम की पूजा करते हैं और कई लोग व्रत भी रहते हैं. सभी लोग अपने घरों को रंगोली और फूलों से सजाकर भगवान राम के आगमन की प्रतीक्षा करते हैं. हर क्षेत्र में रामायण का, भगवान राम के भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है. संध्या के समय भगवान राम की झांकी भी निकाली जाती है जिसमें भगवान राम की प्रतिमा भी होती है. सभी रामभक्त भक्ति में झूमते हुए भगवान राम की कृपा का पात्र बनते हैं और अपने जीवन को सफल बनाते हैं. कुछ स्थानों पर रामलीला संस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाता है इसमें भगवान राम की जीवन संघर्षों को झांकियों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है. रामनवमी का सबसे बड़ा उत्सव अयोध्या में मनाया जाता है क्योंकि यहां पर इस दिन लाखों दिए जलते हैं हजारों श्रद्धालु एक साथ एक क्षेत्र में बैठकर भगवान राम की भक्ति करते हैं क्योंकि इस बार भगवान राम का भव्य मंदिर भी बन गया है और अब रोजाना लाखों श्रद्धालु भगवान राम के दर्शन भी करते हैं.
रामनवमी ही नैतिक और सामाजिक शिक्षा का प्रतीक
रामनवमी के दिन श्रद्धालुओं की संख्या चार गुना बढ़ जाती है. अयोध्या और आसपास के शहरो को दीपक और फूलों से सजे हुए दिखाई देते हैं. रामनवमी हिंदुओं का धार्मिक त्यौहार होने के साथ-साथ समाज को नैतिक और सामाजिक शिक्षा भी देता है क्योंकि भगवान राम ने अपने जीवन में मर्यादा पुरुषोत्तम बनकर अपने कर्तव्य का पालन किया. उन्होंने एक आदर्श पति का जीवन जिया, अपने माता-पिता की आज्ञा का पालन किया. माता कैकई के वचनों के अनुसार 14 वर्ष का वनवास भी स्वीकार किया. इस बात से यह समझा जा सकता है कि भगवान राम सभी के भावनाओं का सम्मान करते हैं.

भगवान राम ने कई राक्षसों का बध करके धरती को सुरक्षित बनाया. लंका पति रावण भी भगवान राम को अपना शत्रु मानता था और सभी ऋषि मुनियों की उपासना विधि को भंग करता था. सभी ऋषियों और देवताओं की प्रार्थना से भगवान राम ने लंका पति रावण का बध किया और पूरे धरती को पाप मुक्त बनाया. इस बात से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि हमें अपने जीवन में अपने माता-पिता, भाई-बहन, गुरु सभी लोगों का सम्मान करना चाहिए और कठिन से कठिन परिस्थितियों में ईश्वर को नहीं भूलना चाहिए. आज के समय में भगवान राम के आदर्शो का महत्व बहुत ही अधिक है क्योंकि आज के समय में न्याय, एकता, भाईचारे की बहुत ही आवश्यकता है।


