आज पूरे देश में हर्ष उल्लास का समय महसूस हो रहा है आज का दिन अत्यंत गौरवपूर्ण तथा ऐतिहासिक रहा है जब राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150वीं वर्षगांठ ही नहीं था अपितु भारत की आत्मा, स्वतंत्रता संग्राम की चेतना तथा भावी पीढ़ीयो के दायित्वों पर चिंतन का महत्वपूर्ण छड़ था. वंदे मातरम् भारत माता के प्रति प्रेम, सम्मान तथा समर्पण की भावना का प्रतीक है. यह गीत केवल गाया ही नहीं जाता अपितु महसूस भी किया जाता है.
स्कूल के बच्चों को संस्कार तथा राष्ट्रभक्ति का संदेश
आज उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में ललिता शास्त्री मोंटेसरी स्कूल के प्रधानाचार्य आर.आर यादव ने कहा है कि आज 150 वर्ष पूर्व रचित वंदे मातरम् आज हम सभी के भारतीय के हृदय में देशभक्ति की ऊर्जा और शक्ति से भर देती है जब स्वतंत्रता आंदोलन के समय देशवासियों को एकजुट यह वंदे मातरम् करता था. सभी विद्यार्थियों को वंदे मातरम् को ऐतिहासिक महत्व से अवगत कराते हुए कहा गया है कि जिस प्रकार इस गीत ने स्वतंत्रता संग्राम के समय में लाखों लोगों के हृदय में शक्ति, साहस तथा दिशा प्रदान की. यह गीत देश की विविधता में एकता का भी संदेश देता है तथा हमें यह भी सीखता है कि भारत की शक्ति तथा संस्कृतिक भाषा तथा धार्मिक विविधताओं में निहित है. उन्होंने आगे भी कहा है कि मांटेसरी शिक्षा पद्धति बच्चों में आत्मनिर्भरता, अनुशासन तथा नैतिक मूल्यों का महत्वपूर्ण रूप से विकास भी करती है.

आज इसी कड़ी में वंदे मातरम् जैसे राष्ट्रगीत बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है जब बच्चे छोटे सी उम्र में ही देश संस्कृति तथा मूल्य को भी समझते हैं तब वह आगे चलकर जिम्मेदार तथा संवेदनशील नागरिक बनकर देश का कल्याण करते हैं. इन्होंने सभी विद्यार्थियों से आवाह्न भी किया है कि वंदे मातरम् को केवल कार्यक्रम तक ही सीमित न रखें अपितु इसके संदेश को अपने दैनिक जीवन में भी हर दिन अपने सत्य, निष्ठा, परिश्रम, करुणा, भाईचारा तथा राष्ट्रहित यह सभी इस गीत की आत्मा का स्वरूप भी है उन्होंने कहा है कि सच्चा राष्ट्र प्रेम केवल नारों से ही नहीं अपितु अच्छे आचरण तथा सकारात्मक कार्यों से प्रकट होता है.

विद्यार्थियों के मन में राष्ट्र प्रेम जगाने का संकल्प
आर.आर यादव ने मीडिया से बातचीत करने के दौरान बताया है कि हमारे विद्यालय पर देशभक्ति के रंग में सराबोर दिखाई दिया है नन्हे विद्यार्थीयों ने देशभक्ति गीतों पर गायन भी किया है भावपूर्ण कविताएं प्रस्तुत की तथा भारत माता के चित्रों के माध्यम से अपनी भावनाएं भी व्यक्त की है। शिक्षकों ने सरल शब्दों में बच्चों को समझाया भी है वंदे मातरम् का अर्थ क्या है तथा हमें अपनी मातृभूमि से क्यों प्रेम करना चाहिए. शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों के महत्व पर भी विशेष रूप से बल दिया गया है उन्होंने आगे बताया कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित न रखें अपितु जीवन को बेहतर बनने का माध्यम बनना चाहिए. ललिता शास्त्री मोंटेसरी स्कूल का उद्देश्य केवल और केवल बच्चों को बौद्धिक रूप से नहीं अपितु नैतिक तथा सामाजिक रूप से भी सशक्त बनाना भी है.

विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा अभिभावकों से यह भी संकल्प लेने का आवाह्न भी किया गया है कि देश की एकता, अखंडता तथा सम्मान की रक्षा करना अति आवश्यक है आज का हर बच्चा भारत का भविष्य है तथा उसका प्रत्येक अच्छा कार्य राष्ट्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में आसानी है. इस दौरान कार्यक्रम का समापन सामूहिक रूप से वंदे मातरम् के गाने के साथ किया गया है पूरे विद्यालय परिसर में राष्ट्रभक्ति की उद्घोष भी सुनाई दी है तथा सभी के चेहरे पर गर्व तथा उत्साह स्पष्ट दिखाई दे रहा है यह आयोजन न केवल एक समारोह था अपितु नई पीढ़ी के मन में, दिल में देश प्रेम की मजबूत नींव रखने वाला प्रेरणादाई प्रयास भी रहा है. ललिता शास्त्री मोंटेसरी स्कूल में आयोजित यह कार्यक्रम यह भी संदेश देता है कि जब शिक्षा तथा राष्ट्रभक्ति एक साथ चलती है तब एक सशक्त संस्कृति तथा उज्जवल भारत का निर्माण निश्चित हो पाता है.


