बस्ती के इस लाल ने पिता की विरासत को संभालां, पूर्वांचल में मशहूर हुआ साहू गैसेस

आज पूरे देश में व्यापार युवा पीढ़ी के लिए आकर्षक करियर बन चुका है जिसमें बदलते बाजार, डिजिटल प्लेटफॉर्म तथा स्टार्टअप संस्कृति ने युवाओं को नए अवसर देकर जीवन का विस्तार कर रहे हैं कई युवा नौकरी की जगह खुद का व्यवसाय प्रारंभ करने की ओर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. सही योजना मार्केट की समझ तथा तकनीकी का उपयोग व्यापार को काफी सफल बना रहा है.

सपनों की विरासत को हकीकत में बदला

उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में 21 वर्षीय गौरव साहू ने अपने पिता की विरासत को संभालते हुए एक मिसाल पेश कर दिया है. गौरव साहू और उनके पिता स्वर्गीय नंदकिशोर साहू समाजसेवी तथा लोहे के विक्रेता के नवाचारों के लिए जाने जाते हैं. इस दुकान का नाम साहू आयरन स्टोर के नाम से विख्यात है. 20/9/2020 कोविद-19 महामारी के दौरान पिता की मृत्यु हो जाने के बाद कई लोगों की आशंका था कि यह काम आगे नहीं चल पाएगा. लेकिन इस लाल ने न केवल जिम्मेदारी उठाई अपितु उसे और आगे बढ़ाया है. आधुनिक तकनीक को अपनाकर तमाम प्रकार के उत्पादकता बढ़ाई तथा पिता द्वारा प्रारंभ किया गया सामाजिक कार्यक्रम को भी जारी रखा. शहरवासियों का कहना है कि गौरव साहू ने सचमुच में अपने पिता का नाम रोशन कर दिया है. गौरव साहू मीडिया से बातचीत करने के दौरान बताया है कि इस उद्योग को छोटे स्तर से प्रारंभ करके बड़े ब्रांड में तब्दील कर दिया है बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बावजूद भी नए विचारों तथा साहस के साथ व्यापार जगत में अपनी पहचान और दुकान का विस्तार कर रहा हूं.

व्यापार अब केवल पेशा ही नहीं अपितु भविष्य की मजबूत राह बना रहा हूं. पिता की मृत्यु के बाद 5 साल से लगातार इस जिम्मेदारी को संभल रहा हूं जिसमें शिक्षा दीक्षा भी पूरी की तथा पिता की विरासत को भी संभल रहा हूं. इस गरीबी और परिवार की जिम्मेदारी के दौरान हाई स्कूल 2022 और इंटरमीडिएट 2024 में उत्तीर्ण किया. जिसमें बी.कॉम की पढ़ाई अभी जारी है. आगे गौरव साहू ने कहा पिता के निधन के बाद सबसे बड़ा सवाल मेरे लिए था कि क्या वह अपने पिता की राह पर चल पाएगा, पढ़ाई पूरी करने के बाद निजी क्षेत्र में एक अच्छी नौकरी या व्यवसाय हो पाएगा, पिता की स्मृतियां तथा जनता के विश्वास ने उसे वापस घर लौटने के लिए मजबूर कर दिया. अब यह सिर्फ मेरे लिए नौकरी नहीं था पिता का सपना था. यह लाल भावुक होकर कहा मैं पूरी तरह से सामाजिक कार्यों में समर्पित हो गया हूं. जिसमें बस्ती कांवरिया संघ चैरिटेबल ट्रस्ट के महासचिव संजय द्विवेदी ने इस लाल को इस ट्रस्ट में प्रदेश अध्यक्ष के पद पर मनोनीत किया. इन्होंने पिता के पुराने प्रोजेक्ट की समीक्षा की कई योजनाएं अधूरी भी थी तथा कई वित्तीय कमी के कारण रुक भी गई थी लेकिन सबसे पहले शिक्षा दीक्षा पर ध्यान केंद्रित किया उसके बाद शहर तथा आसपास के क्षेत्र में पिता के व्यवसाय को विस्तार दिया.

विकसित भारत में नई ऊर्जा के साथ नई शुरुआत

गौरव साहू ने मीडिया से वार्ता करने के दौरान बताया है कि एक साधारण से सुबह थी. लेकिन उस समय दिन का सूर्योदय शहर के लिए एक नई कहानी लेकर आया. एक ऐसी कहानी जिसमें संघर्ष, पारिवारिक, विरासत तथा जिम्मेदारी के प्रति समर्पण की मिसाल छिपी हुई थी पिता के देहांत के बाद न सिर्फ उनके अपूर्ण सपनों को आगे बढ़ाया अपितु उस विरासत को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का संकल्प लिया जिसमें उनके पिता की मेहनत से सींचा हुआ था. बीते साल 2023 में इस लाल ने गैस का प्लांट लगाकर नया इतिहास रच दिया यह प्लांट बस्ती में पहला प्लांट है जिसे पूरे पूर्वांचल में साहू गैसेस के नाम से जाना जाता है. साहू गैसेस की कई इकाइयां अब विस्तार हो रही है. शिक्षा, स्वच्छता तथा शहर के विकास के क्षेत्र में उनके पिता का इतना व्यापक योगदान था कि लोग उन्हें सम्मान से साहू जी के नाम से याद करते थे इनका जीवन सिद्धांत बिल्कुल साफ सुथरा था. समाज बदलेगा, तो भविष्य भी बदलेगा.

ठीक उसी सिद्धांत को जीते हुए इस लाल ने जीवन का विस्तार किया है. साहू जी की मेहनत तथा उनकी निस्वार्थ भावना ने लोगों में एक बार फिर से साहू परिवार में खुशियां लौटा दी. जिसे एक समय में कभी समाज का आधार स्तंभ माना जाता था. क्षेत्र के बड़े बुजुर्गों का भी कहना था कि गौरव साहू में उन्हें अपने पिता की झलक दिखती है गौरव साहू ने खुद को साबित कर दिया है की विरासत सिर्फ जमीन जायदाद से नहीं अपितु उन मूल्यों से होती है जिन्हें अगली पीढ़ी आगे बढ़ाती है. इस लाल ने आगे कहा है कि पिता ने हमें जो रास्ता दिखाया था मैं वही आगे बढ़ा रहा हूं यह सिर्फ उनका सपना पूरा करना ही नहीं अपितु हमारी आने वाले पीढ़ियों के लिए एक बेहतर समाज बनाने के भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है कहानी सिर्फ एक बेटे की अपने पिता के प्रति निष्ठा की कहानी नहीं है यह भी संदेश देता है की विरासत का अर्थ केवल संपत्ति से ही नहीं अपितु आदर्श तथा कर्तव्य से भी होता है एक बेटे ने अपने पिता की छोड़ी हुई विरासत को न सिर्फ अपनाया अपितु उसमें अपनी नई सोच तथा नई ऊर्जा भी जोड़ती है तथा शायद यही किसी भी विरासत को सच्ची सफलता देता है. गौरव साहू ने अंतिम शब्द में भावुक होकर मीडिया को बताया, पापा पूरा पूर्वांचल आज भी आपको याद करता है.

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top