आज पूरे देश में आधुनिक चिकित्सा जगत में महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर लगातार चुनौती विकराल रूप ले रही है. स्त्री एवं प्रसूति रोग विभिन्न प्रकार के डॉक्टरों का योगदान उल्लेखनीय रहा है जिसमें गर्भावस्था, किशोरियों में स्वास्थ्य, प्रसव, प्रजनन संबंधी समस्याओं तथा महिलाओं के समग्र कल्याण पर केंद्रित अपनी सेवाओं के वजह से डॉक्टर आज हर शहर, हर गांव की अग्रणी स्त्री रोग विशेषज्ञ में शुमार की जाती है. जिनकी चिकित्सा पद्धति का मुख्य आधार है संवेदनशीलता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा समय पर जागरूकता।
प्रजनन स्वास्थ्य में वैज्ञानिक सोच, महत्त्वपूर्ण दिशा निर्देश
आज उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में मालवीय रोड ब्लॉक रोड पर स्थित ईरा मेडिकल और क्लिनिक की डाक्टर अनन्या चौधरी ने कहा है कि आज भी देश में कई हिस्सों में महिलाएं स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों को लेकर खुलकर चिकित्सक, डॉक्टर से बात नहीं करती हैं जिसमें कई बार बेहद शर्म, सामाजिक दबाव तथा मिथको की वजह से समस्याएं लगातार प्रचंड रूप ले रहे हैं महिलाओं का शरीर केवल जैविक संरचना ही नहीं अपितु परिवार तथा समाज की सेहत का भी आधार है उनकी देखभाल में किसी भी तरह की लापरवाही पूरे परिवार को भी प्रभावित कर देती है वह लगातार यह भी संदेश दे रही है कि समय पर जांच, सही सलाह तथा नियमित चिकित्सा देखभाल महिलाओं की उम्र, स्वास्थ्य तथा जीवन के गुणवत्ता तीनों में उचित वृद्धि होती है. महिलाओं से इन्होंने अपील भी किया है अपने स्वास्थ्य को बोझ नहीं अपितु निवेश की तरह देखो.

स्वस्थ महिला ही स्वास्थ्य परिवार तथा स्वस्थ समाज का निर्माण करती है इसीलिए नियमित रूप से जांच, संतुलित आहार, मानसिक शांति तथा चिकित्सा सलाह को जीवन का हिस्सा बनना अति आवश्यक है. हाल में ही कुछ सालों में स्वास्थ्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण अभियान में सक्रिय भूमिका भी निभाया जा रहा है लेकिन आज भी गर्भ अवस्था के दौरान पर्याप्त पोषण की कमी, डायबिटीज, एनीमिया, हाई ब्लड प्रेशर तथा संक्रमण जैसी समस्याएं बड़े-बड़े खतरे उत्पन्न कर देती है गर्भवती महिलाओं का समय-समय पर परीक्षण, आयरन की पर्याप्त मात्रा तथा फोलिक एसिड, टीकाकरण तथा प्रसव से पहले की तैयारी पर विशेष ध्यान देना अति आवश्यक है जिससे जटिलताओं में उल्लेखनीय कमी भी आती है तथा सुरक्षित प्रसव की संभावना बढ़ जाती है.

समय पर इलाज तथा सही जांच जरूरी
डॉक्टर अनन्या चौधरी ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया है कि मैं चिकित्सा सेवा के साथ-साथ समाज में महिलाओं को उनके प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकास करने के लिए भी कई कार्यक्रम में भी हिस्सा लेती हूं चाहे ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता शिविर हो तथा शहरी क्षेत्र में हेल्थ टाक्स। महिलाओं को अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने का भी लगातार मैं संदेश दे रही हूं वह मानती है कि डिजिटल युग में सही जानकारी तक पहुंच आसान हुई है लेकिन मिथको तथा गलत सलाह का खतरा भी काफी बढ़ चुका है अब इसलिए डॉक्टर से सीधे सलाह लेना बेहद जरूरी है. किशोरियों के स्वास्थ्य पर भी डॉक्टर अनन्या चौधरी का ध्यान विशेष रूप से केंद्रित है वह मानती है कि स्वस्थ भविष्य की शुरुआत किशोरावस्था से ही होती है इसी बीच कई लड़कियों में माहवारी संबंधी समस्याएं, एनीमिया, हार्मोनल असंतुलन, पोषण, पीसीओएस की कमी जैसे बीमारी प्रचलित है.

इसी कड़ी में लैंगिक स्वास्थ्य जागरूकता को भी उतना ही महत्वपूर्ण इन्होंने माना है वह बोलती है कि सुरक्षित संबंध, वैक्सीन संक्रमण की रोकथाम तथा स्वच्छता जैसे मुद्दों पर आज भी व्यापक जागरूकता की कमी देखी जा रही है यदि महिलाएं अपने स्वास्थ्य को लेकर जागरूक हो तो वह न केवल जीवन भर खुद स्वस्थ रहती हैं अपितु अगले पीढ़ी के नीव को भी मजबूत कर देती हैं इनका मानना है कि अब प्रजनन समस्याओं तथा बांझपन का इलाज करते समय डॉक्टर अनन्या एक संतुलित तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझती है कि दंपतियों को सलाह भी देती हैं बढ़ती उम्र अनियमितता, तनाव, जीवन शैली तथा प्रदूषण जैसे कारक प्रजनन क्षमता को भी प्रभावित करती है ऐसे में उपचार के साथ-साथ जीवन शैली में भी बदलाव होना अत्यंत आवश्यक है उनके अनुसार से महिलाओं तथा पुरुषों दोनों को मिलकर इस विषय को समझना चाहिए क्योंकि प्रजनन की क्षमता केवल एक व्यक्ति का नहीं अपितु पूरे परिवार का मामला होता है.
