आज के समय में जहां चिकित्सा जगह रोजाना नई चुनौतियां सामने आ रही हैं वहीं कुछ ऐसे मामले भी आते हैं जो डॉक्टरों के अनुभव और धैर्य की परीक्षा लेते हैं. ऐसा ही एक अत्यंत जटिल मामला बस्ती में सामने आया जहां पर वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. कीर्ति सिंह ने अपनी विशेषज्ञता का परिचय देते हुए एक प्रसूता की जान बचाकर चिकित्सा क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है.
मौत से जीतकर लौटी जिंदगी, जटिल शल्यक्रिया का सफल संचालन
मीडिया को मिली जानकारी के अनुसार प्रसूता पहले से अधिक जोखिम भरे स्थिति में थी. उसका पहले से ही चार बार सिजेरियन सेक्शन (LSCS) हो चुका था जिसके कारण पांचवी गर्भावस्था अपने आप में गंभीर चिकित्सकीय चुनौती मानी जा रही थी. जांच के समय चिकित्सकों ने पाया कि गर्भ में थोराकोपैगस प्रकार के संयुक्त जुड़वां भ्रूण विकसित हो रहे थे. यह संयुक्त जुड़वां की एक अत्यंत दुर्लभ अवस्था होती है जिसमें दोनों भ्रूण छाती के हिस्से से जुड़े होते हैं और कई बार उनके महत्वपूर्ण अंग भी साझा होते हैं. इस मामले को और भी जटिल बनाने वाली सबसे बड़ी बात यह थी कि दोनों भ्रूणों का हृदय एक ही था तथा दुर्भाग्यवश गर्भ में ही उनकी मौत हो चुकी थी. मृत भ्रूण लंबे समय तक गर्भ में रहने से प्रसूता के शरीर में संक्रमण, अत्यधिक रक्तस्राव और अन्य गंभीर जटिलताओं का खतरा कई गुना बढ़ गया था. चिकित्सकों के अनुसार, यदि समय रहते उचित उपचार नहीं मिलता तो मां की जान बचाना अत्यंत कठिन हो सकता था.

परिवार के लोगों ने बताया कि पहले एक झोलाछाप व्यक्ति द्वारा सामान्य प्रसव कराने का प्रयास किया गया जिससे मरीज की हालत लगातार बिगड़ती चली गई. स्थिति नियंत्रण से बाहर होने पर परिजन उसे तत्काल अस्पताल लेकर पहुंच गए. अस्पताल पहुंचने के बाद डॉ. कीर्ति सिंह और उनकी टीम ने मरीज के गंभीर स्थिति का आकलन किया और बिना समय गवाएं आपातकालीन शल्यक्रिया का निर्णय लिया. चिकित्सकों के सामने कई बड़ी चुनौतियां थीं. पहले से ही चार सीज़ेरियन होने के कारण पेट और गर्भाशय के भीतर ऊतकों के चिपकने की संभावना अधिक थी. इतना ही नहीं बल्कि मृत संयुक्त जुड़वां भ्रूण और संभावित अत्यधिक रक्तस्राव ने ऑपरेशन को और अधिक संवेदनशील बना दिया था. हर कदम पर प्रसूता के जीवन को खतरा था, लेकिन डॉ. कीर्ति सिंह ने अपने वर्षों के अनुभव और टीम के सहयोग से इस जटिल शल्यक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया.

डॉ. कीर्ति सिंह ने चुनौतीपूर्ण सर्जरी कर रचा कीर्तिमान
ऑपरेशन सफल होने के बाद प्रसूता को गहन चिकित्सा निगरानी में रखा गया. राहत की बात यह थी कि समय पर उपचार मिलने के कारण उसकी स्थिति पहले से बेहतर थी और वह तेजी से स्वस्थ हो रही थी. इस सफल इलाज ने न केवल मरीज को बल्कि के परिवार के लोगों को भी नया जीवन दिया. डॉ. कीर्ति सिंह ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि थोराकोपैगस संयुक्त जुड़वां गर्भ अत्यंत दुर्लभ स्थिति होती है और ऐसे मामलों में विशेषज्ञ चिकित्सा की भूमिका सबसे अधिक महत्वपूर्ण होती है. उन्होंने आगे जानकारी देते हुए कहा कि गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच और समय पर चिकित्सकीय सलाह कई गंभीर परिस्थितियों से बचा सकती है. प्रसव हमेशा प्रशिक्षित एवं योग्य स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ की देखरेख में ही कराया जाना चाहिए.

उन्होंने गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों से अपील करते हुए कहा कि किसी भी परिस्थिति में झोलाछाप या अप्रशिक्षित व्यक्तियों से उपचार न कराएं क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही मां और शिशु दोनों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है. डॉ. कीर्ति सिंह ने MBBS, MS, DNB की डिग्रियां प्राप्त की है. वर्तमान समय में प्रातः कालीन ओपीडी में चाइल्ड केयर सेंटर, मालवीय रोड बस्ती में मरीजों को परामर्श एवं उपचार दे रही हैं. उनके द्वारा किया गया यह सफल ऑपरेशन न केवल उनकी चिकित्सकीय क्षमता का प्रमाण था बल्कि यह भी दर्शाता है कि समर्पण, अनुभव और सही समय पर लिए गए निर्णय व्यक्ति को नया जीवन दे सकते हैं।
शम्भूनाथ गुप्ता पिछले 6 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत हैं. वे ‘मीडिया दस्तक’ और ‘बस्ती चेतना’ जैसे प्लेटफॉर्म्स पर न्यूज़ एवं वीडियो एडिटिंग टीम में अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं दे चुके हैं. न्यूज़ प्रोडक्शन, डिजिटल कंटेंट निर्माण और ग्राउंड रिपोर्टिंग में उन्हें गहरा अनुभव प्राप्त है. इसके साथ ही वे ‘भारतीय बस्ती’ में कंटेंट राइटर के रूप में भी कार्य कर चुके हैं, जहां उन्होंने उत्तर प्रदेश से जुड़ी खबरों के लेखन और डिजिटल प्रकाशन में अहम भूमिका निभाई. वर्तमान में वे ‘न्यूज़ ऑफ नेशन’ में संपादक के पद पर कार्यरत हैं और निष्पक्ष, गंभीर व सटीक पत्रकारिता के माध्यम से समाज से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से सामने ला रहे हैं.


