देश के लिए पोस्ट नहीं, योगदान चाहिए – डॉक्टर फैसल अख्तर

पूरे देश ने 26 जनवरी, गणतंत्र दिवस को बहुत ही धूमधाम से मनाया है. विद्यालयों में परेड हुई, सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए, भाषण दिए गए तथा हर ओर तिरंगा शान से लहराता दिखाई दिया है. सोशल मीडिया पर भी देशभक्त की बाढ़ सी आ गई. व्हाट्सएप डीपी, फेसबुक प्रोफाइल, इंस्टाग्राम स्टोरी, हर जगह तिरंगा तथा देशभक्ति के संदेश! लेकिन एक अहम सवाल हमारे सामने खड़ा होता है कि क्या तिरंगे को सिर्फ 26 जनवरी तथा 15 अगस्त को ही याद किया जाता है, क्या राष्ट्र प्रेम केवल सोशल मीडिया पर डीपी बदलने तक सीमित है.

राष्ट्र प्रेम सोशल मीडिया नहीं, सामाजिक जिम्मेदारी

आज उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में स्थित सनराइज स्कूल के प्रधानाचार्य डॉक्टर फैसल अख्तर ने कहा है कि तिरंगा सिर्फ एक झंडा नहीं अपितु यह हमारे देश का स्वाभिमान है, हमारी आजादी का प्रतीक है, उन अनगिनत बलिदानों की कहानी है, जो हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने इस देश के लिए दिए हैं. केसरिया हमें त्याग तथा बलिदान की सीख देता है, सफेद रंग सत्य तथा शांति का संदेश देता है और हरा रंग समृद्धि और आशा का प्रतीक है. बीच में स्थित अशोक चक्र हमें निरंतर कर्म तथा प्रगति की प्रेरणा देता है. लेकिन दुख की बात यह है कि जैसे ही 26 जनवरी गुजरती है अधिकांश लोग तिरंगे को भी भूल जाते हैं. डीपी बदल जाती है.

देशभक्ति के पोस्ट कम हो जाते हैं तथा हम फिर से अपने रोजमर्रा के जीवन में इतने व्यस्त हो जाते हैं राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को पीछे छोड़ देते हैं. सही और सच्चा राष्ट्र प्रेम सिर्फ नारों से नहीं कर्म से दिखता है. तिरंगे को सम्मान देना केवल झंडा फहराने तक सीमित नहीं है अपितु उसके मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने से है .जब हम ईमानदारी से पढ़ाई करते हैं, जब हम अपने माता-पिता तथा शिक्षकों का सम्मान करते हैं, जब हम समाज के नियमों का पालन करते हैं, जब हम दूसरों की मदद करते हैं, तभी हम सच्चे अर्थों में तिरंगे का सम्मान करते हैं.

देशभक्ति पोस्ट से नहीं, आचरण से दिखती है

डॉक्टर फैसल अख्तर ने मीडिया से बातचीत करने के दौरान बताया है कि आज के विद्यार्थियों के लिए यह समझना बहुत ही जरूरी है कि देश का भविष्य उनके हाथों में है. आप ना केवल कल के नागरिक नहीं है अपितु समाज के जिम्मेदार नागरिक भी है. विद्यालय में अनुशासन, समय का पाबंदी, स्वच्छता, आपसी भाईचारा यह सभी राष्ट्र निर्माण की नींव है. यदि आप सड़क पर कचरा नहीं फैलाते, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करते हैं, जरूरतमंद की सहायता करते हैं, तो आप हर दिन तिरंगे को सलामी दे रहे होते हैं. सोशल मीडिया पर तिरंगे की डीपी लगाना गलत नहीं है. लेकिन अगर हमारी देशभक्ति वही खत्म हो जाए तो यह आत्ममंथन का विषय है.

असली सवाल यह नहीं है कि हमने क्या पोस्ट किया बल्कि यह है कि हमने देश के लिए क्या किया. गणतंत्र दिवस हमें यह याद दिलाता है कि हमारा संविधान हमें अधिकार देता है लेकिन साथ ही कर्तव्य की भी याद दिलाता है. एक अच्छा नागरिक वही है जो अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों को भी उतनी ही गंभीरता से निभाए. आज आवश्यकता है कि हम तिरंगे को साल के 365 दिन अपने दिल में रखें. लेकिन उसे अपने व्यवहार में उतारे, अपने शब्दों में नहीं अपने कार्यों में देशभक्ति दिखाएं, जब एक छात्र मेहनत से पड़ता है तब एक शिक्षक ईमानदारी से पढ़ाता है. एक नागरिक नियमों का पालन करता है. तभी भारत सशक्त बनता है. अंत में उन्होंने यही संदेश दिया है कि तिरंगा कभी उतरा नहीं जाना चाहिए. ना झंडे से, ना दिल से। गणतंत्र दिवस एक दिन है लेकिन राष्ट्र प्रेम का निरंतर यात्रा है.

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