मां दुर्गा की आराधना और विजयादशमी का उल्लास, विद्यालय में दिखा उत्सव का रंग – अमरमणि पांडेय

शारदीय नवरात्रि भारतीय संस्कृति, धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक चेतना का एक महत्वपूर्ण पर्व है. यह पर्व हमें मां दुर्गा की शक्ति, साहस, त्याग और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है. नवरात्रि के पावन अवसर पर देल्ही पब्लिक सीनियर्स स्कूल के डायरेक्टर अमरमणि पांडेय ने इस पर्व के सांस्कृतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक महत्व के बारे में बताया.

नवरात्रि के आध्यात्मिक संदेश से गूंजा देल्ही पब्लिक सीनियर्स स्कूल

नवरात्रि केवल पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है बल्कि यह जीवन में सकारात्मकता, अनुशासन, संयम और सदाचार अपनाने का संदेश भी देता है. नौ दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है. श्रद्धालु व्रत रखते हैं, मंदिरों में दर्शन करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि तथा समाज की खुशहाली के लिए प्रार्थना करते हैं. यह पर्व लोगों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ने का अवसर प्रदान करता है. नवरात्रि का एक प्रमुख संदेश नारी शक्ति का सम्मान करना है. मां दुर्गा को शक्ति का प्रतीक माना जाता है. उनके विभिन्न स्वरूप साहस, ज्ञान, करुणा, धैर्य और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करने की प्रेरणा देते हैं. वर्तमान समय में समाज के प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह महिलाओं का सम्मान करे, उन्हें समान अवसर प्रदान करे और उनकी शिक्षा, सुरक्षा तथा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने में सहयोग करे.

शिक्षा के क्षेत्र में भी नवरात्रि के संदेश का विशेष महत्व है. हमारे विद्यालय विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि उन्हें अच्छे संस्कार, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक भी बनाते हैं. ऐसे पर्व विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, धार्मिक विविधता और पारस्परिक सम्मान की भावना समझने का अवसर देते हैं. शिक्षकों और अभिभावकों की भूमिका इसमें महत्वपूर्ण होती है कि वह बच्चों को त्योहारों के वास्तविक उद्देश्य से परिचित कराएं. नवरात्रि हमें यह भी सिखाती है कि जीवन में कठिनाइयों का सामना धैर्य और आत्मविश्वास के साथ करना चाहिए. मां दुर्गा की आराधना के माध्यम से श्रद्धालु बुराई पर अच्छाई की विजय का संकल्प लेते हैं. यह संदेश व्यक्तिगत जीवन के साथ-साथ सामाजिक जीवन में भी प्रासंगिक है.

आस्था, शक्ति और संस्कारों का संगम बना विजयादशमी उत्सव

समाज में व्याप्त भेदभाव, अशिक्षा, अंधविश्वास और नकारात्मकता को दूर करने के लिए जागरूकता, शिक्षा और आपसी सहयोग आवश्यक है. त्योहारों की सुंदरता तभी बढ़ती है, जब उनमें सामाजिक सद्भाव और भाईचारे की भावना भी शामिल हो. नवरात्रि के अवसर पर लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं, धार्मिक आयोजनों में भाग लेते हैं और सामूहिक रूप से खुशियां मनाते हैं. ऐसे अवसर समाज में एकता और सहयोग को मजबूत करने में योगदान देते हैं. सभी लोगों को चाहिए कि वे इस पर्व को श्रद्धा के साथ मनाएं और स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण तथा सामाजिक जिम्मेदारी का भी ध्यान रखें. देल्ही पब्लिक सीनियर स्कूल के डायरेक्टर अमरमणि पांडेय ने नवरात्रि की शुभकामनाओं के साथ विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और क्षेत्रवासियों को सदाचार, शिक्षा, नारी सम्मान तथा सामाजिक एकता का संदेश देने का प्रयास किया है. नवरात्रि का वास्तविक उद्देश्य केवल उत्सव मनाना नहीं है बल्कि अपने आचरण में अच्छे विचारों और संस्कारों को अपनाना भी है.

यदि प्रत्येक व्यक्ति मां दुर्गा के आदर्शों से प्रेरणा लेकर सत्य, न्याय, करुणा और सम्मान को अपने जीवन का हिस्सा बनाए, तो परिवार और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है. यही इस पावन पर्व की सार्थकता है. इसी क्रम में विद्यालय परिसर में 15 अक्टूबर को विजयादशमी का पर्व हर्षोल्लास एवं गरिमामय वातावरण में मनाया गया. कार्यक्रम का शुभारंभ डायरेक्टर अमरमणि पाण्डेय, प्रधानाचार्य अर्चना पाण्डेय, एकेडमिक इंचार्ज दिव्या पाठक एवं वाइस प्रिंसिपल दिनेश त्रिपाठी ने दीप प्रज्ज्वलन और प्रभु श्रीराम के पूजन से किया. इस अवसर पर बच्चों को भारतीय संस्कृति एवं नैतिक मूल्यों से जुड़ने का संदेश दिया. बच्चों को क्रोध, अहंकार और आलस्य रूपी आंतरिक रावण का दहन करने की प्रेरणा दी गई. नन्हे विद्यार्थियों ने राम, सीता और हनुमान के स्वरूप में मनमोहक प्रस्तुतियां देकर सभी का मन मोह लिया. कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण भव्य रावण दहन रहा. जय श्रीराम के गगनभेदी जयकारों से विद्यालय परिसर गूंज उठा. आयोजन में शिक्षक-शिक्षिकाओं का सराहनीय योगदान रहा।

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