अयोध्या का राम मंदिर भारतीय विरासत के साथ-साथ सनातनियों के आस्था का केंद्र है- प्रिन्सी पाल

देश में राम नाम की महिमा हर कोई सुनने के लिए उत्सुक है अब इस कड़ी में यह वह भूमि बन चुका है जहां पर धर्म, सत्य तथा मर्यादा की नींव मानी जाती है. आज अयोध्या हमें याद दिलाती है कि समाज केवल इमारत से नहीं अपितु मूल्यो से बनता है यहां की धूल में इतिहास छिपा हुआ है यहां की हवा में संस्कार है तथा यहां की संस्कृति में शक्ति विराजमान है.

भक्ति के साथ हम शक्ति हैं, ध्वजारोहण समारोह

आज उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में मालवीय रोड पर स्थित उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक की डिप्टी मैनेजर बिटिया प्रिन्सी पाल ने पूरे देशवासियों को ध्वजारोहण की शुभ घड़ी को लेकर के शुभकामनाएं व्यक्त की और आगे उन्होंने कहा कि जो पूरे विश्व को दिशा दे सकता है वह अयोध्या हमें यह सिखाती है कि जीवन में शांति, सम्मान तथा संतुलन ही वास्तविक प्रगति का मार्ग है. मैं एक युवा महिला के रूप में खड़ी हूं तथा मेरे मन में गर्व, उत्साह तथा आस्था की ऐसी तरंगे उमड़ रही है जिन्हें शब्दों में बांधना अब आसान नहीं है क्योंकि आज हम सिर्फ एक ध्वज को फहराने की तैयारी ही नहीं कर रहे हैं अपितु हम एक युग के पुनर्जागरण का स्वागत भी कर रहे हैं.

आज हम रामलला के आशीर्वाद से उस इतिहास को भी पूरा करने जा रहे हैं जिसका सपना हमारे कई पीढियां ने सजाया हुआ था 25 नवंबर को अयोध्या में होने वाला ध्वजारोहण केवल एक धार्मिक कार्यक्रम ही नहीं है अपितु यह हमारी सांस्कृतिक जड़ों, हमारी पहचान तथा हमारी परंपरा का भी प्रतीक पूरा विश्व देख रहा है इस ध्वज में केवल कपड़ा ही नहीं लगा हुआ है अपितु 140 करोड लोगों की भावनाएं भक्ति संघर्ष तथा संकल्प जुड़ा हुआ है. आज मैं एक युवा महिला होने के नाते मेरे लिए यह दिन इसलिए भी खास हो चुका है क्योंकि यह पल हमें यह संदेश दे रहा है कि हमारी संस्कृति में स्त्री को वही सम्मान तथा स्थान मिला है जैसे माता सीता को मिला हुआ था इस कड़ी में भगवान राम ने केवल मर्यादा पुरुषोत्तम ही नहीं वह न्याय, सत्य, संतुलन तथा सम्मान के प्रतीक पूरे विश्व में माने जाते हैं. मैं एक युवती होने के नाते यह बताना चाहती हूं कि आज का ध्वजारोहण समारोह हम जैसी बेटियों को यह प्रेरणा देता है की भक्ति के साथ हम शक्ति भी है.

प्रभु राम का अर्थ सत्ता ही नहीं बल्कि सत्य है।

प्रिन्सी पाल ने मीडिया से खास बातचीत करते करने के दौरान कहा है कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की जीवन गाथा हमें यह भी सिखाती है कि समाज तभी श्रेष्ठ बनता है जब वह स्त्री के सम्मान तथा सुरक्षा को सर्वोपरि रखता है. उन्होंने आगे कहा है कि धर्म का अर्थ कट्टरता ही नहीं- कर्तव्य है, राम का अर्थ सत्ता नहीं – सत्य है, अयोध्या का अर्थ सिर्फ एक स्थान ही नहीं अपितु यह एक आदर्श का स्थान है. आज इस खास अवसर पर अयोध्या धाम में जो तैयारी की जा रही है चाहे वह दीपों की रोशनी हो, वेद मंत्र की ध्वनि, फूलों की सुगंध, तथा श्रद्धालुओं की उत्सुकता ही सब मिलकर पूरे वातावरण को पवित्र तथा उत्सव में बना दिया है.

ध्वजारोहण से पहले ही जिस प्रकार वेदाचार्य द्वारा विशेष अनुष्ठान दिव्य तरीके से किया जा रहा है सुरक्षा तथा व्यवस्थाएं मजबूती भी की जा रही है शहर को लगातार सजाया जा रहा है जिसमें यह स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है कि यह छड़ आने वाली पीढ़ियां के लिए भी काफी यादगार होने वाला है. 25 नवंबर का कार्यक्रम हमें एक और बात भी याद दिलाती है की राम केवल मंदिर में स्थापित होने के लिए इस धरती पर नहीं आए हैं अपितु वह हमारे व्यवहार, हृदय तथा विचार में स्थापित हो चुके हैं. प्रिन्सी पाल ने कहा अगर हमें सचमुच राम राज्य जैसा समाज बनाना है तो हमें न्याय तथा सत्य के मार्ग पर चलना होगा स्त्री का सम्मान करना होगा, समाज में समानता, करुणा तथा सेवा की भावना के रास्ते पर चलना होगा और अपनाना होगा सबसे महत्वपूर्ण अपने भीतर राम के मूल्य जगाने होंगे.

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top