देश में ध्वजारोहण मंदिर निर्माण की यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव है जिसमें उन करोड़ों श्रद्धालुओं की धैर्यपूर्ण प्रतिष्ठा का भी सम्मान माना जा रहा है. जिन्होंने सालों से इस पल को अपने हृदय से संजोय रखा था. ध्वजारोहण के साथ-साथ ही अयोध्या धाम आध्यात्मिक तथा सांस्कृतिक पुनर्जागरण की नई दिशा में आगे बढ़ता जा रहा है अब यह पल पूरे देश के लिए उत्साह, भावनात्मक तथा गर्व एकता का प्रतीक बनेगा.
अयोध्या आधुनिकता के साथ हुई जगमग
आज उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में बस्ती उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के पूर्व जिला महामंत्री तथा वर्तमान समय में कार्यरत जिला संयोजक सूर्यकुमार शुक्ल ने कहा है कि भारत एक ऐसा देश है जहां विभिन्न धर्मों को मानने वाले लोग रहते हैं। भारत के प्रमुख धार्मिक स्थल जैसे वाराणसी उज्जैन काशी मथुरा वृंदावन और अयोध्या है जो विश्व पटल पर पूजे जाते हैं। वर्तमान समय में अयोध्या पूरी दुनिया को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। आधुनिक युग में अयोध्या आधुनिकता के साथ जगमगा रही है। अयोध्या को भूमि है जहां भगवान विष्णु मानव का अवतार लेते हैं। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष के नवमी के दिन भगवान श्री राम अयोध्या की पुण्य भूमि पर चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ के यहां मानव के रूप में प्रकट होते हैं।
भगवान राम का जीवन संघर्ष, कैकई वचन, वनवास, पुत्र और पत्नी वियोग, लंका युद्ध से संबंधित सभी वास्तविक कथाएं किसी से छिपी नहीं है। भगवान राम का जीवन संघर्ष आज के मानव को मानवता, मर्यादा, तपस्या, त्याग, बलिदान, साहस तथा सत्य और धर्म के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है। वर्तमान समय में अयोध्या राम मंदिर का पुनर्निर्माण पूरे विश्व में चर्चा का विषय बना हुआ है। राम मंदिर भारत के भव्यता और दिव्यता का आधार बना हुआ है। अयोध्या का राम मंदिर सभी सनातनियों का स्वाभिमान और राजमुकुट है। इस राज मुकुट को 500 वर्ष पहले मुगल शासक बाबर ने कुचलने का साहस किया था.

500 वर्षों का यह संघर्ष आज सिद्ध
सूर्यकुमार शुक्ल ने आगे कहा आज 500 साल बाद बाबर की छाती पर ही भगवा ध्वज सनातनियों के स्वाभिमान को ऊंचाई देते हुए लहरा रहे हैं। मंदिर के ध्वस्त होने से लेकर मंदिर का फैसला आने तक राम भक्तों ने आसहनीय कष्ट और संघर्ष झेला। बाबरी मस्जिद को गिराने के लिए हजारों निहत्थे कारसेवकों ने अपने प्राण की बलि चढ़ा दी। मुगल शासन , अंग्रेज शासन, तानाशाही और तुष्टिकरण की सरकार के शासन के बाद जब भारत में हिंदुत्व की सरकार बनी तब जाकर सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार भारत के पक्ष में फैसला सुनाया। 500 वर्षों का यह संघर्ष आज सिद्धि प्राप्त कर चुका है। आज अयोध्या अपनी गौरवशाली संस्कृति के साथ-साथ आधुनिकता को लेकर चल रही है।
5 अगस्त 2020 को अयोध्या राम मंदिर का शिलान्यास व भूमि पूजन प्रधानमंत्री जी की उपस्थिति में किया गया। 22 जनवरी 2024 को अयोध्या के राम मंदिर का उद्घाटन तथा भगवान राम के बाल स्वरूप की प्राण प्रतिष्ठा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रमों से की गई थी। 5 जून 2025 को राजाराम सहित माता सीता अर्थात “राम दरबार” की प्राण प्रतिष्ठा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ के कर-कमलों से की गई थी। आज मंदिर निर्माण कार्य पूरा हो चुका है इस शुभ अवसर पर 25 नवंबर 2025 को राम मंदिर के शिखर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्री रामध्वजा फहराएंगे। यह ध्वज भारतीय संस्कृति, विरासत और संस्कार व स्वाभिमान का प्रतीक होगा। 25 नवंबर 2025 का दिन सनातनियों के विजय का शंखनाद दिवस होगा।


