आखिर देल्ही पब्लिक सीनियर स्कूल, यूरोकिड्स प्री-स्कूल में बच्चों को क्यों कराया गया मॉक ड्रिल का अभ्यास?

पचपेड़िया रोड स्थित प्रतिष्ठित देल्ही पब्लिक सीनियर स्कूल, यूरोकिड्स प्री-स्कूल में 21 सितंबर को प्राकृतिक आपदाओं और आग लगने जैसी आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए विशेष जागरूकता सत्र एवं मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्देश्य नन्हे बच्चों को आपदा की स्थिति में घबराने के बजाय धैर्य, अनुशासन और सतर्कता के साथ सुरक्षित रहने के जरूरी उपायों से परिचित कराना था. मॉक ड्रिल में विद्यालय के बच्चों के साथ शिक्षकों और सहयोगी स्टाफ ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया.

अचानक बजा सायरन और एक्टिव हुए बच्चे, यूरो किड्स में हुआ खास मॉक ड्रिल

मॉक ड्रिल के दौरान आपातकालीन स्थिति का वातावरण तैयार कर बच्चों और विद्यालय के कर्मचारियों को बताया गया कि किसी भी संकट की स्थिति में सबसे पहले स्वयं को शांत रखना आवश्यक है. सायरन बजते ही बच्चों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सुरक्षित तरीके से बाहर निकलने का अभ्यास कराया गया. उन्हें बताया गया कि आपातकाल के समय अफरातफरी या धक्का-मुक्की करने के बजाय एक-दूसरे का सहयोग करते हुए निर्धारित निकास मार्ग का इस्तेमाल करना चाहिए. अभ्यास के दौरान बच्चों को विद्यालय परिसर से सुरक्षित खुले स्थान तक पहुंचने की प्रक्रिया समझाई गई. बच्चों को एक निश्चित स्थान पर एकत्र होने, शिक्षकों के निर्देशों का पालन करने तथा अपने साथियों की सुरक्षा का ध्यान रखने के बारे में भी जानकारी दी गई. इस दौरान बच्चों ने पूरी प्रक्रिया को उत्सुकता के साथ समझा और दिए गए निर्देशों का अनुशासनपूर्वक पालन किया.

जागरूकता सत्र में बच्चों को भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा के दौरान अपनाई जाने वाली बुनियादी सुरक्षा तकनीकों के बारे में भी बताया गया. उन्हें ड्रॉप, कवर एंड होल्ड यानी झुकें, सुरक्षित स्थान पर छिपें और मजबूत वस्तु को पकड़कर रखें की प्रक्रिया समझाई गई. बच्चों को बताया गया कि भूकंप के दौरान घबराकर भागने के बजाय पहले स्वयं को सुरक्षित करना चाहिए और परिस्थिति सामान्य होने पर सुरक्षित स्थान की ओर जाना चाहिए. कार्यक्रम के दूसरे चरण में अग्नि सुरक्षा को लेकर विशेष प्रशिक्षण दिया गया. विद्यालय के शिक्षकों और कर्मचारियों को आग लगने की स्थिति में तत्काल उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी दी गई. उन्हें अग्निशामक यंत्र यानी फायर एक्सटिंग्विशर के संचालन की प्रक्रिया का व्यावहारिक अभ्यास कराया गया. साथ ही आग की स्थिति में बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने, आपातकालीन मार्ग का उपयोग करने और स्थिति को नियंत्रित करने के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में भी जानकारी दी गई.

प्राकृतिक आपदा और आग से बचाव की दी जानकारी, यूरो किड्स के बच्चों ने किया अभ्यास

विद्यालय के कर्मचारियों को आपातकालीन प्राथमिक उपचार से संबंधित जरूरी जानकारी भी दी गई. किसी बच्चे को चोट लगने या अचानक स्वास्थ्य संबंधी समस्या उत्पन्न होने की स्थिति में तत्काल प्राथमिक सहायता देने तथा आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की प्रक्रिया का अभ्यास कराया गया. प्रशिक्षण के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि आपदा की स्थिति में विद्यालय का प्रत्येक कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी को स्पष्ट रूप से समझे, ताकि बच्चों को बिना किसी भ्रम के सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया जा सके. विद्यालय प्रबंधन ने कहा कि किसी भी अप्रत्याशित संकट या प्राकृतिक आपदा के समय सतर्कता और सही समय पर लिया गया उचित निर्णय महत्वपूर्ण होता है. बच्चों को केवल किताबी जानकारी देने के बजाय वास्तविक परिस्थितियों का अभ्यास कराना उन्हें आपातकालीन परिस्थितियों के लिए मानसिक रूप से तैयार करने की दिशा में उपयोगी कदम है. मॉक ड्रिल का उद्देश्य बच्चों के मन से आपदा और आग जैसी परिस्थितियों का अनावश्यक डर कम करना तथा उन्हें सुरक्षा के बुनियादी नियमों से परिचित कराना रहा.

प्रबंधन ने कहा कि छोटे बच्चों को बचपन से ही सुरक्षा संबंधी व्यवहार सिखाने से वे आपातकालीन परिस्थितियों में निर्देशों को बेहतर ढंग से समझ और उनका पालन कर सकते हैं. इसके साथ ही शिक्षकों और कर्मचारियों की नियमित तैयारी भी जरूरी है क्योंकि किसी भी आपदा के समय बच्चों की सुरक्षा की बड़ी जिम्मेदारी विद्यालय के स्टाफ पर होती है. कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने उत्साहपूर्वक विभिन्न गतिविधियों में भाग लिया. उन्होंने सायरन सुनकर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार बाहर निकलने, सुरक्षित स्थान पर एकत्र होने और शिक्षकों के निर्देशों का पालन करने का अभ्यास किया. मॉक ड्रिल के माध्यम से बच्चों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि आपातकालीन स्थिति में डरने के बजाय शांत रहकर सही कदम उठाना चाहिए. विद्यालय प्रबंधन ने कहा कि इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित किए जाते रहने चाहिए, ताकि बच्चों, शिक्षकों और कर्मचारियों को सुरक्षा प्रक्रियाओं का निरंतर अभ्यास मिलता रहे. कार्यक्रम के अंत में बच्चों को आपदा प्रबंधन और अग्नि सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण नियमों को दोहराया गया. मॉक ड्रिल ने बच्चों को सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ विद्यालय के स्टाफ को भी आपातकालीन परिस्थितियों में अपनी भूमिका और जिम्मेदारियों को समझने का अवसर दिया।

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