आज देश में किसी भी क्षेत्र में सफलता की बात करें तो सफलता किसी एक दिन में नहीं मिलती. इसके लिए कई सालों की मेहनत, धैर्य तथा निरंतर सीखने की आवश्यकता होती है यही कहानी है की साल 2011 में एक छोटे से कमरे से कंप्यूटर कोर्स की प्रारंभ हुई थी. आज इस सफर को पूरे 14 साल बीत चुके हैं तथा यह हजारों विद्यार्थियों के लिए शिक्षा तथा करियर का मजबूत आधार भी बन चुका है.
मेरा सपना जो आकार लेेता गया, अवध ग्लो
आज उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में सुर्तीहट्टा में स्थित अवध ग्लो के हेड एंड मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल कुमार शर्मा ने बताया है कि 2011 का वह समय था कि जब कंप्यूटर शिक्षा छोटे कास्बो तथा ग्रामीण इलाकों में उतनी आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रहा था. विद्यार्थियों में सीखने की इच्छा तो थी लेकिन उन्हें सही मार्गदर्शन तथा सुलभ प्रशिक्षण केंद्र की जरूरत भी थी. इस आवश्यकता को पहचानते हुए यह तय किया गया कि वह अपने क्षेत्र में कंप्यूटर शिक्षा को लगातार भविष्य में बढ़ावा देंगे सीमित समाधान, कम जगह तथा शुरुआती आर्थिक परेशानियों के बावजूद राहुल शर्मा ने हिम्मत नहीं हारी, उनके पास जो था वह बस ज्ञान, जुनून तथा बदलाव लाने की इच्छा ही थी.

इस कड़ी में राहुल शर्मा ने कंप्यूटर बेसिक डीसीए, टैली, टाइपिंग तथा इंटरनेट प्रशिक्षण जैसे कोर्सेज से प्रारंभ हुआ. धीरे-धीरे विद्यार्थियों का विश्वास बढ़ने लगा. इनका तरीका बिल्कुल सरल ही था कैरियर मार्गदर्शन तथा मोटिवेशन, हर विद्यार्थी को व्यक्तिगत ध्यान, प्रैक्टिकल आधारित ट्रेनिंग तथा कम फीस में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा। इन 14 सालों में अनेक चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा है कभी मशीन खराब हो जाती, तो कभी बिजली की समस्या और कभी-कभी तो आर्थिक संकट, कभी-कभी विद्यार्थियों की कमी। लेकिन हर बार और मजबूती से लौटे समय के साथ-साथ उन्होंने केंद्र को आधुनिक तकनीकी से अपग्रेड कर दिया. नए कंप्यूटर कनेक्ट किया, स्मार्ट क्लासरूम की शुरुआत हुई तथा ऑनलाइन प्रशिक्षण भी प्रारंभ किया. आज के समय में अवध ग्लो से हजारों विद्यार्थी कंप्यूटर साक्षर बन चुके हैं.

चुनौतियों से सफलता तक का सफर
राहुल कुमार शर्मा मीडिया से खास वार्ता के दौरान बताया है कि कई विद्यार्थियों ने सरकारी नौकरियां हासिल की है तथा कई प्राइवेट सेक्टर में कार्यरत है, कई ने खुद का व्यवसाय भी प्रारंभ कर दिया है. यह सब देखकर हमारा संघर्ष सार्थक हो जाता है. उन्होंने कहा मैं सिर्फ कोर्स को पढ़ता ही नहीं अपितु विद्यार्थियों का आत्मविश्वास भी बढ़ाता हूं उन्होंने अपने संबोधन में कहा है कि आज के समय में कंप्यूटर शिक्षा कितनी आवश्यक है तथा यह कैसे किसी भी करियर की मजबूत नींव बन सकती है तथा उनकी इसी सोच ने इसे एक टीचर से बढ़कर एक मेन्टर बना दिया है. अब इन 14 सालों में यह संस्थान सिर्फ एक कंप्यूटर सेंटर ही नहीं रहा है अपितु युवाओं की उम्मीदों का केंद्र भी बन चुका है यहां से निकलने वाले विद्यार्थी अपने परिवार तथा समाज में गर्व का वजह भी बन रहे हैं. 2011 में प्रारंभ हुआ यह सफर आज उपलब्धियां का अध्याय बन चुका है.

14 साल के निरंतर मेहनत, संघर्ष तथा ईमानदारी ने अवध ग्लो शिक्षा का मजबूत स्तंभ बन चुका है. जब यह संस्थान का आरंभ हुआ तब सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ कंप्यूटर सीखना ही नहीं था अपितु लोगों को कंप्यूटर के महत्व के बारे में जागरूक करना भी पड़ता था. उस समय बहुत से लोग यह मानते थे कि कंप्यूटर सिर्फ बड़े शहर में काम आता है यह पढ़ाई का हिस्सा बिल्कुल नहीं है गांव तथा कस्बो में छात्रों और अभिभावक को यह समझना आसान नहीं था कि भविष्य की दुनिया पूरी तरह डिजिटल होने वाली है. उन्होंने कहा मैं घर घर जाकर, स्कूलों में जाकर तथा स्थानीय कार्यक्रम में भाग लेकर लोगों के बीच जागरूकता फैलाना भी आरंभ किया, उनको समझाया कंप्यूटर ज्ञान सिर्फ नौकरी के लिए नहीं अपितु हर क्षेत्र में जरूरी है. लेकिन अगर नियत साफ हो तथा मेहनत सच्ची हो तो छोटे से शुरू किए गए कदम भी एक दिन बड़ी मंजिल तक पहुंचती है यही कारण है कि आज यह अवध ग्लो संस्थान पूरे बस्ती मंडल में विस्तारित है.



