आज गांधीनगर शहर में फैशन तथा भरोसे का नाम बन चुकी प्रतिष्ठित दुकान रूपम रीगलिया पिछले कई दशकों से ग्राहकों की पहली पसंद बनी हुई है. साल 1974 में स्थापित यह दुकान न सिर्फ कपड़ों का व्यापार है अपितु यह एक विरासत है जिसे पीढ़ी दर पीढ़ी सजाया गया है. आज इस विरासत को नई सोच तथा आधुनिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रहा है. करनप्रीत सिंह वाधवा जो वर्तमान समय में इस व्यवसाय की कमान को संभाल रहे हैं.
गांधीनगर की फैमिली शॉप रूपम रेंगलिया
मीडिया से बातचीत करने के दौरान करन प्रीत सिंह वाधवा ने कहा है कि उन्होंने अपने जीवन के प्रारंभ सालों में शिक्षा को प्राथमिकता दी है. उन्होंने लगभग 9 साल तक बाहर रहकर पढ़ाई की जिससे उन्हें न केवल अकादमिक ज्ञान मिला अपितु जीवन को समझने का व्यापक नजरिया भी विकसित हुआ है. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने 2 साल तक गुड़गांव में नौकरी भी की है. जिसमें जहां पर कॉर्पोरेट माहौल में काम करने का अनुभव प्राप्त किया है. इस अनुभव ने उन्हें प्रोफेशनल सोच, कस्टमर हैंडलिंग तथा बिजनेस मैनेजमेंट की बारीकियां सिखाई हैं. इसके बाद करन प्रीत सिंह वाधवा ने पारिवारिक व्यवसाय में जोड़ने का फैसला लिया. उन्होंने बताया कि बिजनेस में कदम रखना आसान नहीं था.

लेकिन परिवार के मार्गदर्शन तथा अपने अनुभव के दम पर उन्होंने इस चुनौती को स्वीकार किया है. आज उन्हें इस व्यवसाय से जुड़े हुए करीब 3 साल पूरे हो चुके हैं तथा इस दौरान उन्होंने रूपम रीगलिया को एक नई पहचान देने का प्रयास किया है. रूपम रीगलिया की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह एक कंप्लीट फैमिली शॉप है. यहां पर छोटे बच्चों के कपड़ों से लेकर युवाओं तथा बड़ों तक सभी के लिए कपड़ों की विस्तृत रेंज उपलब्ध है. दुकान में बच्चों के रेडीमेड कपड़े, लेडिज वियर, बॉयज वियर तथा फैमिली के हर सदस्य की जरूरत को ध्यान में रखकर कलेक्शन तैयार किया जाता है. यही वजह है कि एक ही छत के नीचे पूरे परिवार की शॉपिंग संभव हो पाती है.
भरोसा तथा आधुनिक फैशन का संगम
यहां पर ग्राहकों ने बताया है कि रूपम रीगलिया में कपड़ों की क्वालिटी डिजाइन तथा उचित कीमत तीनों का बेहतरीन संतुलन देखने को मिल पाता है. सालों से इस दुकान में ग्राहकों के साथ जो भरोसे का रिश्ता बनाया है. वहीं इसकी सबसे बड़ी पूंजी है. पुराने ग्राहक आज भी नई पीढ़ी के साथ यहां खरीदारी के लिए आते हैं. जो इस दुकान की विश्वसनीयता को दर्शाता है. करनप्रीत सिंह वाधवा ने कहा कि आज के समय में फैशन तीव्र गति के साथ परिवर्तित हो रहा है. इसीलिए वह लगातार नए ट्रेंड्स तथा आधुनिक डिजाइनों को दुकान में शामिल करने की कोशिश कर रहे हैं. इसके साथ-साथ ही वह पारंपरिक मूल्यों को बनाए रखते हुए ग्राहक सेवा पर विशेष ध्यान देते हैं.

उनका मानना है कि अगर ग्राहक संतुष्ट है तो वही सबसे बड़ी सफलता है. गांधीनगर जैसे शहर में जहां प्रतियोगिता लगातार बढ़ रही है. वहां 1974 से आज तक रहना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है. रूपम रीगलिया न केवल एक दुकान है अपितु यह मेहनत, ईमानदारी तथा निरंतर की मिसाल है. करनप्रीत सिंह वाधवा की नई सोच तथा पुराने अनुभव का संगम इस व्यवसाय को आने वाले सालों में और ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखता है. अंत में यह कहना गलत नहीं होगा कि रूपम रेंगलिया आज सिर्फ एक कपड़ों की दुकान नहीं अपितु गांधीनगर की एक पहचान बन चुकी है. जो फैशन के साथ-साथ भरोसे की परंपरा को भी आगे बढ़ा रही है.


