गायत्री मंदिर परिसर में 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर एक गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन धूमधाम से किया गया. आज इस अवसर पर गायत्री मंदिर के व्यवस्थापक जगदंबिका पांडेय ने देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा है कि गणतंत्र दिवस के महत्व, भारतीय संविधान तथा नागरिकों के अधिकार पर विस्तार से प्रकाश डाला है. कार्यक्रम में मंदिर से जुड़े कार्यकर्ता स्थानीय नागरिक युवा वर्ग तथा महिलाएं बड़ी संख्या में उपस्थिति रही.
जगदंबिका पांडेय ने अधिकारों को दिलाए याद
इस खास पर्व पर अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए जगदंबिका पांडेय ने सभी देशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं भी दी है. उन्होंने कहा है कि 26 जनवरी केवल एक राष्ट्रीय पर्व ही नहीं अपितु यह दिन हमारे अधिकार कर्तव्य तथा लोकतांत्रिक मूल्यों को याद दिलाता है. इसी दिन भारत ने स्वयं को एक संपूर्ण गणराज्य के रूप में स्थापित किया तथा देश को उसका संविधान पूर्ण रूप से प्राप्त हुआ. आगे उन्होंने कहा है कि गणतंत्र दिवस हमें यह स्मरण करता है कि भारत का हर नागरिक सम्मान अधिकार से संपन्न है. संविधान ने हमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता का अधिकार धर्म की स्वतंत्रता तथा न्याय का अधिकार दिया है. इन अधिकारों की रक्षा करना हम सभी का सामूहिक दायित्व है.

जगदंबिका पांडेय ने युवाओं को विशेष रूप से संबोधित करते हुए कहा है कि आज का युवा ही देश का भविष्य है. यदि युवा अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्य को समझ ले तो भारत को एक सशक्त आत्मनिर्भर तथा समृद्ध राष्ट्र बनाने से कोई नहीं रोक सकता. उन्होंने आगे कहा है कि केवल अधिकारों की बात करना पर्याप्त नहीं अपितु संविधान में वर्णित कर्तव्यों का पालन करना ही उतना ही जरूरी है. भारतीय संस्कृति तथा अध्यात्म का उल्लेख करते हुए कहा है कि गायत्री मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं अपितु संस्कार सेवा तथा राष्ट्र निर्माण की भावना को विकसित करने का केंद्र है. उन्होंने कहा कि अध्यात्म हमें नैतिक मूल्यों से जोड़ता है तथा जब नैतिकता तथा लोकतंत्र साथ चलते हैं तभी एक सशक्त समाज का निर्माण हो पाता है.
गणतंत्र दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम
इस कार्यक्रम के दौरान जगदंबिका पांडेय ने देश की स्वतंत्रता सेनानियों तथा संविधान निर्माता को नमन किया है. उन्होंने डॉ भीमराव अंबेडकर के योगदान को याद करते हुए बताया है कि आज जो अधिकार हमें प्राप्त है वह उनके अथक प्रयासों का परिणाम है. उन्होंने कहा है कि हमें संविधान का सम्मान करना चाहिए तथा उसे केवल एक किताब नहीं अपितु जीवन का मार्गदर्शन मानना चाहिए. उन्होंने समाज में बढ़ रही असमानता, हिंसा तथा वैमनस्य पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि गणतंत्र की आत्मा भाई-चारे तथा सद्भाव में बसती है. यदि हम एक दूसरे के प्रति सम्मान तथा सहयोगिता का भाव रखें तो देश की एकता तथा अखंडता और अधिक मजबूत हो जाएगी.

इस कार्यक्रम के अंत में उन्होंने सभी उपस्थित लोगों से आवाहन किया है कि वह अपने जीवन में संविधान के मूल्यों को अपने तथा समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास करें. उन्होंने कहा छोटा सा प्रयास भी यदि सच्ची नियत से किया जाए तो वह बड़ा बदलाव में बदल सकता है. इस अवसर पर ध्वजारोहण राष्ट्रगान तथा देशभक्ति गीतों का आयोजन भी किया गया. पूरे परिसर में देशभक्ति का वातावरण देखने को मिला है. कार्यक्रम का समापन वंदे मातरम् तथा भारत माता की जय के नारों के साथ हुआ है. गायत्री मंदिर में आयोजित यह गणतंत्र दिवस समारोह न केवल एक औपचारिक आयोजन रहा अपितु यह नागरिकों को उनके अधिकारों तथा कर्तव्यों की याद दिलाने वाला एक प्रेरणादायक कार्यक्रम साबित हुआ है.


