होली पर हर भारतवासी का चेहरा कमल सा खिले – भाजपा नेत्री रोली सिंह

होली के विशेष मौके पर जिलाध्यक्ष भाजपा महिला मोर्चा बस्ती डॉ रोली सिंह ने पूरे जनपद को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि होली भारतीय संस्कृति का पवित्र पर्व होने के साथ-साथ भारत की एकता, अखंडता और हर्ष,उमंग का भी प्रतीक है. ये रंग भरी होली केवल चेहरे को ही रंगीन नहीं करती बल्कि हमारी भावनाओं में भी रंग भरती हैं। होली के प्यार भरे रंग इस बात को भी प्रमाणित करता है कि खुशियां कभी ना कभी हमारी झोली में जरूर आएंगी।

होली पर छाया आनंद और उल्लास

भाजपा नेत्री रोली सिंह ने कहा होली के दिन हर भारतवासी का चेहरा कमल के फूल की तरह खिला और आनंदित होता है. यह आनंद भारत के हरी भरी समृद्धि को भी दिखाता है. भारत के त्योहारों में ही भारत की एकता, अखंडता और अहिंसा का दर्शन किया जा सकता है. होली का त्यौहार हमारे जीवन में ढेर सारी खुशियां लेकर आती है. छोटे-छोटे बच्चे पिचकारियों से एक दूसरे पर रंग फेंकते हैं उसके साथ ही परिवार के बड़े लोग अबीर और गुलाल से एक दूसरे को रंग लगाते हैं और एक-दूसरे को गले भी लगते हैं. गले लगाने का मतलब अपने पुराने गिले शिकवे को भूलकर एक नई जीवन का शुरुआत करना.

होली का पवित्र पर्व भी हमें यही सिखाता है कि हम अपनी सारी बुराइयों को मिटा कर एक दूसरे को गले लगा कर मानवता को स्वीकार करें. होली के प्राचीन धार्मिक कथा की बात की जाए तो होली का विशेष संबंध विष्णु भक्त प्रह्लाद और उनकी वुआ होलिका के साथ जुड़ा हुआ है. दैत्यों के राजा हिरण्यकशिपु जो भगवान विष्णु को अपना दुश्मन मानता था और हिरण्यकशिपु का पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु पूजा करता और उन्हें को अपना पिता मानता था. हिरण्यकशिपु को अपने पुत्र की ये बात अच्छी ना लगी और उसने अपनी बहन होलिका को बुलाया और कहा कि तुम्हें ब्रह्मा से वरदान दान मिला है कि तुम आग में जल नहीं सकती.

होली खुशियों का प्रतीक, सनातन की पहचान

मीडिया से बातचीत करने के दौरान डॉ रोली सिंह ने कहा इस प्रकार हिरण्यकशिपु ने होलिका को आदेश दिया कि वह प्रह्लाद के साथ जलती हुई अग्नि में बैठ जाए। अग्नि में बैठने के बावजूद भी भगवान विष्णु के भक्त प्रहलाद को कुछ भी नहीं हुआ और हिरण्यकशिपु की बहन होलिका उसी आग में जल भी गई। इस प्रकार बुराई का अंत हुआ और भगवान विष्णु के भक्त प्रहलाद के भक्ति की विजय हुई. इस धार्मिक विजय को ध्यान में रखते हुए हमारे पूर्वजों ने इस दिन को होलिका दहन के नाम से संबोधित किया और तब से यह पर्व मनाया जाने लगा. यह धार्मिक कथा इस बात को भी सिद्ध करती है कि बुराई की आधी कितनी ही तेज क्यों ना हो परंतु वह आस्था के दीपक को कभी वुझा नहीं सकती.

इस पौराणिक कथा से हमें यह भी संदेश मिलता है कि भक्ति में शक्ति होती है और भक्त का अपने आराध्य से अटूट संबंध भी होता है. दूसरी तरफ होली का त्यौहार भगवान श्री कृष्णा और राधा जी कुछ खास संबंध रखता है. माना जाता है कि भगवान श्री कृष्ण ने वृंदावन में राधा जी को और सभी गोपियों को सबसे पहले रंग लगाया. तभी से होली का त्यौहार भारतीय परंपरा में सम्मिलित हुआ. होली का त्योहार विशेष रूप से बसंत ऋतु के आगमन का भी प्रतीक माना जाता है. भारत के सभी त्योहारों में सामाजिक प्रेम, सामानता, एकता और अखंडता के दर्शन किए जा सकते हैं. आज मैं भाजपा नेत्री डॉ रोली सिंह एक बार फिर बस्ती के आम जनमानस को होली की ढेर शुभकामनाएं देते हुए उनके मंगल भविष्य की कामना करती हूं.

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