आज देश में मकर संक्रांति का पावन पर्व सकारात्मक ऊर्जा के साथ हर कोई मना रहा है. आज यह केवल धार्मिक पर्व ही नहीं अपितु संस्कृतिक, जीवन में अनुशासन, परिश्रम, नई दिशा का प्रतीक भी है. आज यह त्योहार प्रकृति में नई ऊर्जा का संचार भी कर रहा है. मकर संक्रांति का पर्व इसलिए विशेष माना जाता है कि आज के दिन सूर्य अपनी दिशा से उत्तरायण होता है और नकारात्मक शक्तियों का अंत होता है और सकारात्मक ऊर्जा फैलती है.
मकर संक्रांति के अवसर पर सेवा तथा परिश्रम का संदेश
आज उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में होटल प्रकाश के संचालक स्कंद गिरोत्रा देशवासियों को ढेर सारी शुभकामनाएं देते हुए अपने विचार को बताया है उन्होंने आगे कहा है कि भारत विविधताओं का देश है तथा मकर संक्रांति अलग-अलग राज्यों में विभिन्न नाम तथा परंपराओं के साथ मनाया जाता है कहीं यह पोंगल के नाम से, तो कहीं बिहू, तो कहीं उत्तरायण के नाम से जाना जाता है. लेकिन इन सभी उत्सव का मूल भाव एक ही है. परिश्रम का सम्मान, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता तथा समाज में आपसी भाईचारा को मजबूत करना है. यह पर्व हमें हमारी जड़ों से जोड़ता है तथा हमारी समृद्धि, संस्कृतिक विरासत की याद भी दिलाता है.

होटल तथा सेवा क्षेत्र से जुड़े व्यक्ति के रूप में मेरा यहां मानना है की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है. आतिथ्य सत्कार भारतीय संस्कृति की हम पहचान भी रही है. अतिथि देवो भव: का भाव हमें न केवल अपने व्यवसाय में अपितु अपने दैनिक जीवन में भी अपनाना चाहिए. होटल प्रकाश की स्थापना का उद्देश्य यह भी है कि हर अतिथि को सम्मान, शुद्धता तथा आत्मीयता के साथ सेवा प्रदान की जाए. जब हम दिल से सेवा करते हैं तभी विश्वास तथा संबंध मजबूत होता है. मकर संक्रांति हमें परिश्रम तथा निरंतरता का महत्व भी सीखता है जैसे किसान पूरे साल मेहनत करता है तथा फसल कटाई के समय आनंद मानता है वैसे ही जीवन में भी सफलता के लिए धैर्य तथा मेहनत अति आवश्यक है. आज के समय में जब प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है तब ईमानदारी, गुणवत्ता तथा सेवा भाव भी हमें आगे ले जा सकता है.

नई शुरुआत तथा सांस्कृतिक मूल्यों का पर्व
आज इस अवसर पर मैं देशवासियों को विशेष रूप से कहना चाहता हूं कि अपने लक्ष्य को स्पष्ट रखें तथा मेहनत से पीछे ना हटे आज का युवा भारत की सबसे बड़ी ताकत बन चुका है. अगर युवा सकारात्मक सोच, नैतिक मूल्य तथा आत्मनिर्भरता के मार्ग पर आगे बढ़ता है. तो देश को नई ऊंचाइयों तक ले जाना निश्चित है. छोटे व्यवसाय स्थानीय उद्योग तथा स्वरोजगार को अपनाकर हम न केवल अपने लिए अपितु समाज के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा भी कर सकते हैं. मकर संक्रांति का पर्व हमें सामाजिक जिम्मेदारी का भी एहसास कराता है. समाज के कमजोर वर्ग की सहायता करना, जरूरतमंद के साथ खुशियां बांटना तथा पर्यावरण का संरक्षण करना यह सभी हमारे कर्तव्य है.

आज जब दुनिया कई चुनौतियों का सामना कर रही है. तब हमें एक दूसरे के प्रति संवेदनशील तथा सहयोगी बनना होगा. आज आवश्यकता है कि हम अपने परंपराओं को संजोते हुए आधुनिकता के साथ संतुलित बनाएं. स्वदेशी उत्पादों को अपने स्थानीय व्यवसाय को समर्थन देता है. वोकल फार लोकल को जीवन का हिस्सा भी बनाएं. इससे देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी तथा आत्मनिर्भर भारत का सपना भी साकार होगा. आज इस अवसर पर सभी देशवासियों से मेरा यह अपील है कि इस मकर संक्रांति पर हम यह संकल्प ले कि हम अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाए, ईमानदारी तथा सेवा भाव के साथ आगे बढ़े तथा एक समृद्धि सशक्त तथा एक जुट भारत के निर्माण में अपना योगदान दें.


