यूपी के इस जिले में मिली आजादी की प्रेरणा

वंदे मातरम केवल दो शब्द ही नहीं है अपितु अब यह भारत की आत्मा, स्वतंत्रता संग्राम की चेतना तथा राष्ट्रभक्ति की जीवंत अभिव्यक्ति है जो इस ध्येय वाक्य ने न केवल भारत की आजादी दिलाने के लिए क्रांतिकारी तथा स्वतंत्रता सेनानियों को एकजुट किया अपितु देशवासियों के भीतर नई ऊर्जा, साहस तथा बलिदान की भावना भी जागृत करती है आज भी वंदे मातरम् का उच्चारण होते ही हर भारतीय के मन में देशभक्ति का भाव उमड़ और जागृत हो जाता है.

वंदे मातरम् बना आजादी की लड़ाई का महत्वपूर्ण संकल्प

आज उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में श्री महाजन उच्च स्तर माध्यमिक विद्यालय मेहदावल रोड में वंदे मातरम् सामूहिक गान का आयोजन बहुत ही धूमधाम से किया गया है जिसमें करीब करीब 11 विद्यालय ने लगभग 1000 से अधिक विद्यार्थी जनप्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया है. इस कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ दीप प्रज्वलित करके किया गया. जिसमें राष्ट्रीय ध्वज फहराकर उपस्थित जन समुदाय को देश प्रेम का महत्वपूर्ण संदेश दिया गया है आज इस पावन अवसर पर ओम प्रकाश आर्य तथा संरक्षक जगदीश मिश्र द्वारा अतिथियों को ओम पट्टिका पहनाकर भव्य स्वागत किया गया है. इसी कड़ी में आर्य वीरदल बस्ती के आर्य वीरों ने आसान सपूत का प्रदर्शन भी किया है.

जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में महेश शुक्ला उपाध्यक्ष गौ सेवा आयोग उत्तर प्रदेश ने बताया है कि वंदे मातरम् की रचना प्रसिद्ध साहित्यकार तथा राष्ट्रवादी विचारक बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने किया था. यह गीत उनके उपन्यास आनंद मठ में पहली बार प्रकाशित किया गया था. यह उस समय देश अंग्रेजी शासन की जंजीरों में जकड़ा हुआ था तथा जनमानस में निराशा का वातावरण था तब ऐसे कठिन दौर में वंदे मातरम् ने भारत माता को देवी के रूप में प्रस्तुत करके देशवासियों के भीतर मातृ भूमि के प्रति अपार समर्पण तथा प्रेम की भावना उत्पन्न की थी. स्वतंत्रता संग्राम के दौरान वंदे मातरम् एक क्रांतिकारी नारे के रूप में उभरा. कांग्रेस के अधिवेशनों, आंदोलन, रैलियां तथा जिलों तक इसकी गूंज भी सुनाई देती थी जब जब अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आवाज बुलंद की गई तब तक वंदे मातरम् ने आंदोलनकारियों को साहस तथा संबल प्रदान किया है यह नारा अंग्रेजी शासको के लिए भय का कारण भी बन गया. क्योंकि इससे जनता में जागरूकता और विद्रोह की भावना तीव्र गति से फैलती थी. इन्होंने विद्यालय के बच्चों को इन बातों को बताकर मन में उत्साह और शक्ति पैदा की है.

दो शब्द बना करोड़ों दिलों की देशभक्ति

ओम प्रकाश आर्य ने मीडिया से बातचीत करने के दौरान बताया है कि वंदे मातरम् ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को भावनात्मक शक्ति प्रदान की है यह नारा केवल राजनीतिक आजादी की मांग नहीं करता था अपितु भारतीय संस्कृति आध्यात्मिक तथा सामाजिक एकता का प्रतीक भी माना जाता है देश के कोने कोने में आए हुए लोग चाहे हुए किसी भी भाषा धर्म या वर्ग के हो वंदे मातरम् के माध्यम से एक सूत्र में बध गए. आजादी के बाद भी वंदे मातरम का महत्व कम नहीं हुआ आज यह गीत राष्ट्रीय समारोह, विद्यालय, सांस्कृतिक कार्यक्रमों तथा देशभक्ति आयोजनों में सम्मान के साथ गया जाता है जब नई पीढ़ी को अपने इतिहास, बलिदान तथा संघर्ष की याद दिलाती है.

तब युवा वर्ग वंदे मातरम् का अर्थ समझता है तो उसके अंदर राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी तथा कर्तव्य बोध का भाव जागृत होता है. वंदे मातरम आज के समय में भी उतना ही प्रासंगिक है जितना स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान हुआ करता था. जब देश सामाजिक आर्थिक तथा वैश्विक चुनौतियों का सामना कर रहा था तब यह ध्येय वाक्य नागरिकों को एकजुट होकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की प्रेरणा भी देता है. हमें यह भी सीखना है कि देश हित सर्वोपरि है तथा व्यक्तिगत स्वार्थ के ऊपर उठकर समाज तथा राष्ट्र के लिए कार्य करना ही सच्ची देशभक्ति है. विद्यालय में वंदे मातरम् के इतिहास तथा महत्व को पढ़ाया जाना चाहिए ताकि विद्यार्थियों को स्वतंत्रता संग्राम की सही समझ भी मिल सके. यह केवल एक गीत ही नहीं अपितु एक विचारधारा है जो देश को जोड़ने तथा आगे बढ़ने का भी कार्य करता है.

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