डॉ राजेश पटेल ने डॉक्टर्स , शिक्षकों, इंजीनियर इसके साथ ही भारत की आम जनता को होली की शुभकामनाएं देते हुए कहां कि
बसंत ऋतु का आगमन हो चुका है और हर साल महाशिवरात्रि के बाद मार्च महीने में रंगों का पावन उत्सव होली आगमन होता है। केवल भारत ही नहीं बल्कि जहां-जहां पर भी सनातन धर्म के अनुयायी पाए जाते हैं. वहां वहां पर होली का त्यौहार मनाया जाता है।
डॉ राजेश पटेल ने होली की दी हार्दिक शुभकामनाएं
क्योर मल्टी स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल के लेप्रोस्कॉपी और जनरल सर्जन डॉ राजेश पटेल ने कहा व्यापक रूप से होली भारत में ही मनाया जाता है. यहां की होली रंगों के साथ-साथ फूलों की भी होली खेली जाती है। अगर मैं भारत के अर्थव्यवस्था की बात करूं तो मात्र होली से ही भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आसमान को छू लेती है. क्योंकि भारत की जनसंख्या लगभग 150 करोड़ के आसपास है। अधिकतर लोग रंग गुब्बारे, पिचकारी, गुलाल, अबीर खरीदते हैं. जिससे भारत की आर्थिक अर्थव्यवस्था मजबूत होती है. इतना ही नहीं बल्कि लोग नए-नए कपड़े खरीदते हैं , मिठाइयां और अनेक प्रकार के व्यंजनों को भी खरीदा जाता है. इससे भी भारत की आर्थिक व्यवस्था को एक नई मजबूती मिलती है। हम जानते हैं कि होली के त्यौहार शुरुआत होलिका दहन से होती है और दूसरे दिन सुबह से लेकर शाम तक रंगों को उड़ाया जाता है.

प्राचीन पौराणिक कथाओं के अनुसार होलिका दहन के दिन सत्य की जीत और बुराई की हार हुई थी. इसलिए होलिका दहन का दिन हमें अपने अंदर की बुराइयों को जलाने और सही रास्ते पर चलने की प्रेरणा भी देता है। दूसरा दिन होली ‘राधा कृष्ण के अमर प्रेम’ का भी अद्भुत उदाहरण माना जाता है. क्योंकि इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने राधा जी को रंग लगाया था। तब से लेकर अब तक होली का त्यौहार मनाया जाने लगा। भारत के कई क्षेत्रों में होली से पहले भगवान श्री कृष्ण के लिए खाटू श्याम जी के लिए शोभा यात्राएं भी निकली जाती हैं. यह शोभा यात्रा विशेष रूप से कृष्ण प्रेमी या खाटूश्याम प्रेमी ही निकलते हैं। इस शोभा यात्रा में भगवान कृष्ण और राधा जी की झांकी और खाटू श्याम जी की प्रतिमा विशेष रूप से निकली जाती है. जो इस शोभा यात्रा के आकर्षक को बढ़ाती है और सभी भक्त खाटू श्याम जी का प्रतिमा दर्शन करते हैं और उनका भजन गाते, नाचते हुए चलते हैं।
होली लाये सभी के जीवन में खुशियां
डॉ राजेश पटेल ने मीडिया से बातचीत करने के दौरान कहा अबकी 4 मार्च 2026 की होली में हमें इस बात पर भी ध्यान देना होगा कि हम रासायनिक रंगों का प्रयोग कम करेंगे और फूलों की होली पर सबको जागरूक करेंगे. क्योंकि फूलों की होली ही प्राकृतिक होली मानी जाती है। होलिका दहन से पहले हमें अपने घर की साफ-सफाई पर और घर को आकर्षक रूप से सजाने पर भी विशेष ध्यान देना होगा। इसके साथ ही हमें अपने घर के आसपास मोहल्ला ,गांव ,गली की स्वच्छता पर भी विशेष ध्यान देना होगा। होली के शुभ अवसर पर हमें स्वविकास से राष्ट्र निर्माण के कार्य संकल्प लेना होगा. क्योंकि हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती आत्मनिर्भर और विकसित भारत की है। हमारे भारत को आजाद हुए लगभग 8 दशक होने वाले हैं और अभी तक हमारा भारत विकसित नहीं हुआ है. इसलिए हमें इस शुभ अवसर पर यह संकल्प लेना होगा कि हम जल्द से जल्द खुद का विकास करेंगे और अपने भारत को विकसित बनाएंगे। हमारे भारत में रामराज की स्थापना हो चुकी है.

अब ये राम राज्य सारे आदर्श हर भारतीय के चरित्र में दिखाई देनी चाहिए। अब हमें राम के सिद्धांतों पर चलकर राष्ट्र निर्माण का कार्य शुरू करना चाहिए. हमें 24 घंटे अपने राष्ट्र के प्रति समर्पित रहने का संकल्प लेना होगा ताकि हमारा भारत जल्द से जल्द विकसित राष्ट्रो की श्रेणी में आ सके और इसके साथ ही विश्व गुरु का दर्जा भी प्राप्त कर सके. होली के त्यौहार हमें पुरानी दुश्मनी, अहंकार, क्रोध को मिटाकर सामाजिक एकता, बंधुत्व, भाईचारे और प्यार की भावना को बढ़ावा देने की भी प्रेरणा लेकर भी आता है. मुझे खुशी है कि अब हमारा भारत अनेक रंगों से सजा हुआ दिखाई देगा. इसके साथ ही चारों ओर स्वच्छता का भी वातावरण छाया रहेगा। सभी के घरों पर अनेक प्रकार के मिष्ठान और व्यंजन भी बनाए जाएंगे और लोग एक दूसरे के घर जाकर रंग लगाकर एक दूसरे को गले भी लगाएंगे। होली के शुभ अवसर पर मैं सभी सनातनियों को होली की अनंत शुभकामनाएं देते हुए ईश्वर से उनकी मंगल प्रार्थना करता हूं।


