आज पूरे देश में डॉक्टर की कार्यशाली सिर्फ इलाज ही नहीं करना अपितु मरीजों को नई जिंदगी देना है डॉक्टर का वह हाथ है जो दर्द को मिटाता है, वह विश्वास है जो निराशा को उम्मीद में परिवर्तित कर देता है, हर मरीज के पीछे एक कहानी होती है तथा डॉक्टर उस कहानी को बेहतर अंत देने का लगातार प्रयास जारी रखता है दिन-रात के मेहनत संवेदनशीलता तथा समर्पण ही उसका सच्चा जीवन दाता बनता है.
घर पर ही मानवता की सेवा, घर बना उपचार केंद्र
आज उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में शहर के शांत इलाके में पुलिस लाइन मार्ग पर स्थित डॉक्टर के.के तिवारी बाल रोग विशेषज्ञ आवास आज एक चिकित्सालय से कम नहीं लगता है यहां पर हर रोज अनेक परिवार अपने विकलांग बच्चों को नई उम्मीद, नई रोशनी तथा बदलाव की चाह लेकर लोग यहां पर पहुंच रहे हैं पेशे से अनुभवी बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर ने अपने घर पर ही विशेष रूप से विकलांग बच्चों का उपचार लगातार करते हैं तथा उन्हें ठीक करके पुनः उनके सामान्य दिनचर्या की ओर अग्रसर करते हैं यह इस प्रकार की अनूठी पहल न केवल समाज में सकारात्मक परिवर्तन कर रहा है अपितु ऐसे बच्चों तथा उनके परिवारों के जीवन में अनमोल खुशियों की बारिश कर रही है. प्रारंभ की गई यह सेवा पिछले कई सालों से निरंतर जारी है उन्होंने देखा है कि कई परिवार आर्थिक, सामाजिक तथा दूरी की वजह से अस्पताल तक बार-बार नहीं पहुंच पाते हैं खासकर ऐसे बच्चे जिनका लंबे समय तक फिजियोथैरेपी, डेली केयर तथा निरंतर चिकित्सा सहायता की आवश्यक रूप से जरूरत होती है उनके लिए नियमित उपचार कठिन भी हो जाता है.

ऐसी समस्याओं को समझते हुए डॉक्टर ने अपने घर को ही एक उपचार केंद्र के रूप में परिवर्तित कर दिया है. अब यहां पर सभी बच्चों को न केवल चिकित्सा सुविधा ही दी जाती है अपितु उनकी विशेष रूप से आवश्यकताओं को समझते हुए व्यक्तिगत देखभाल भी प्रदान की जाती है फिजियोथैरेपी रोग के माध्यम से दैनिक व्यायाम, पोषण संबंधी मार्गदर्शन, मानसिक सामाजिक सहयोग तथा बच्चों की प्रगति का लगातार आकलन यह सब एक ही स्थान पर ही, एक ही छत के नीचे व्यवस्थित है यही कारण है कि आसपास ही नहीं दूर दराज के क्षेत्र से भी लोग अपने बच्चों को यहां लाकर ठीक करके खुशहाल होकर अपने घर वापस लौटते हैं. समाज के प्रति उनकी संवेदनशीलता काबिले तारीफ है जरूरतमंद तथा आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों का इलाज बेहद कम लागत में और कभी-कभी निशुल्क भी कर दिया जाता है इनका कहना है कि किसी बच्चे का भविष्य आर्थिक कठिनाइयों की वजह से अधूरा किसी भी हालत में नहीं होना चाहिए. आज के दौर में जब दुनिया तीव्र गति के साथ आगे बढ़ रही है तब ऐसे समय में डॉक्टर का यह प्रयास मानवता की एक ऐसी मिसाल कायम करती है जो समाज के हर वर्ग को प्रेरणा दे रही है विकलांग बच्चों को सिर्फ बीमारी ही नहीं अपितु संभावनाओं की नजर से देखने का नजरिया वह सीखाते हैं इस संस्था का नाम कार्तिकेय सेवा समिति बाल विकास केंद्र के नाम से जाना जाता है.

अब मरीजों को नई जिंदगी देने का व्रत, सेवा का संकल्प
इस कड़ी में कार्तिकेय सेवा समिति बाल विकास केंद्र की संचालिका डॉक्टर पूर्णिमा तिवारी ने मीडिया से बातचीत करने के दौरान बताया कि यह सिर्फ एक पेशा ही नहीं अपितु मानव कल्याण सेवा है जब कोई बच्चा जिसे खड़े होने में भी कठिनाई होती थी कुछ महीनो में वह चलने लगता है तो वह खुशी शब्दों में बयां नहीं की जा सकती है अब मुझे लगता है कि ईश्वर ने मुझे यह कार्य करने का मुझे एक बड़ा अवसर दिया है तथा यह मेरा कर्तव्य कि मैं पूरी क्षमता से इसे हर स्तर से निभाऊंगी उनके घर पर आने वाले बच्चों का उपचार किसी सामान्य चिकित्सा पद्धति जैसा बिल्कुल भी नहीं होता हर बच्चा अलग है, उसकी समस्याएं अलग है तथा उसके लिए आवश्यक उपचार भी बिल्कुल अलग रूप ले रखा है, यही वजह है कि हर बच्चे की विस्तृत जांच सही ढंग से और अलर्ट मोड में की जाती है तथा उसके बाद एक व्यक्तिगत उपचार योजना बनाई जाती है तथा माता-पिता को भी उस प्रक्रिया का भी हिस्सा बनाया जाता है जिसमें घर पर भी बच्चे की देखभाल सही ढंग से सही इलाज हो सके.

एक ऐसी ही बच्ची के पिता बताते हैं कि उनकी बेटी जन्म से ही शारीरिक रूप से कमजोर थी तथा वह चल भी नहीं पाती थी कई जगह इलाज भी करवाया लेकिन सुधार बहुत कम हुआ है जब वह डॉ के.के तिवारी के पास पहुंचे तब वह मात्र 6 महीना में बच्ची ने सहारे से चलना प्रारंभ कर दिया वह यह भी बताते हैं कि हमारे लिए यह किसी चमत्कार से कम ही नहीं है डॉक्टर साहब ने सिर्फ इलाज ही नहीं किया हमें मानसिक रूप से भी कई गुना मजबूत कर दिया है. इस संस्थान का घर का वातावरण भी बच्चों के अनुकूल तरीके से रखा गया है यहां पर रंग-बिरंगे खिलौने सीखने, सिखाने वाली पूर्ण रूप से सामग्री, संगीत मधुर तथा एक सकारात्मक माहौल यह सब कुछ बच्चों के मानसिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका भी निभा रहा है बच्चे यहां पर आते ही सहज महसूस करने लगते हैं जो उनके उपचार को तथा प्रभावी और भी बनता है. कई माता-पिता ने इस सेवा को देखते हुए आसपास के कई युवाओं को भी प्रेरित होकर सामाजिक कार्यों में रुचि लेना प्रारंभ कर दिया है कई स्वयं से भी संगठन भी उनके केंद्र में जुड़ने की इच्छा भी व्यक्त कर रहे हैं ताकि इस कार्य को और भी बड़े स्तर पर फैलाया जा सके. पूर्णिमा तिवारी का उद्देश्य स्पष्ट है कि हर बच्चे को एक बेहतर भविष्य मिले तथा उसे समाज में सम्मानपूर्वक, स्वतंत्र जीवन जीने योग्य बनाया जाए डॉक्टर जैसी हस्तियों के कारण ही समझ में सकारात्मक बदलाव संभव किया जा रहा है इनका यह समर्पण हमें यह याद दिलाता है कि एक व्यक्ति की नियत तथा मेहनत कई परिवारों की किस्मत भी बदल सकती है.



