आज देश के कई राज्यों में अब धार्मिक और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत माहौल के बीच गत दिनों से आयोजित कुण्डीय महायज्ञ में राम दरबार की प्रस्तुति इस पावन उत्सव में चार चांद लगा दिया है इस महायज्ञ आयोजन में गायत्री परिवार की तरफ से धार्मिक, संस्कृति, सदाचार और सामाजिक एकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजन किया गया है.
भक्ति और संस्कृति आध्यात्मिक का संगम
आज उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में जी.वी.एम कान्वेंट स्कूल के मैनेजिंग डायरेक्टर संतोष सिंह ने कहा है कि इस पवित्र और पावन आयोजन में स्कूल के छात्र-छात्राओं ने दीपक, आयुष, वैभव, शालिनी, जय और नैतिक शिक्षिकाएं प्रतिष्ठा, पूजा, ममता, प्रीति शिवानी, हिना ने सक्रिय रूप से महत्वपूर्ण योगदान दिया है. हमारे विद्यालय के बच्चों ने तथा शिक्षकों द्वारा प्रस्तुत राम दरबार जिसमें राम, सीता, लक्ष्मण, हनुमान आदि प्रमुख पात्र का किरदार निभाए हैं इस कार्यक्रम को धार्मिक तथा सांस्कृतिक दोनों दृष्टि से समृद्धि किया गया है इन बच्चों की प्रस्तुति में उनकी मासूमियत प्रशिक्षण तथा उत्साह की झलक स्पष्ट रूप से दिख रही है.

जबकि शिक्षिकाओं और प्रबंधन टीम की देखरेख ने इसे सुगंधित और प्रभावशाली बनाया है. उन्होंने कहा इस महायज्ञ का आयोजन स्थल पर कार्यक्रम के दौरान वैदिक मंत्र, पाठ पूजा, अर्चना तथा कलश यात्रा जैसी पारंपरिक गतिविधियों के साथ संस्कृति और नैतिक संदेश का अद्भुत संगम महसूस किया गया और देखा गया है. आज गायत्री परिवार ने यह महायज्ञ समाज में सकारात्मक परिवर्तन, संयम, नैतिकता और सेवा भावना को बढ़ावा देना इनका उद्देश्य है. हमारे विद्यालय द्वारा की गई राम दरबार प्रस्तुति ने युवा वर्ग पीढ़ी में धर्म, संस्कार और संस्कृति के प्रति जागरूकता जगाने का कार्य किया है.
गायत्री महायज्ञ में विद्यालय स्तरीय पर रंगारंग प्रस्तुति
इसी बीच मीडिया से बातचीत करते हुए प्रधानाचार्य विजय लक्ष्मी सिंह ने कहा है कि इस प्रकार की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया है क्योंकि इससे बच्चों में सामाजिक सरोकार, उत्साह तथा आत्मीयता की भावना भी विकसित होती है कुल मिलाकर इसमें 151 कुण्डीय महायज्ञ में जी.वी.एम कान्वेंट स्कूल की भागीदारी न केवल एक सांस्कृतिक प्रस्तुति रही अपितु यह एक संदेश भी था कि युवा शिक्षित और समर्पित पीढ़ी समाज को धर्म, संस्कार और मानवता की राह पर चलने का संदेश दिया है. इस आयोजन के अंतर्गत महायज्ञ में वेद मंत्र, पूजा अर्चना, कीर्तन भजन, सामाजिक जागरण, नारी सशक्तिकरण और युवा संस्कार जैसे इस कार्यक्रम को करके बढ़ावा दिया गया है.

जिससे यह आयोजन सिर्फ धार्मिक ही नहीं अपितु सामाजिक बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है हमारे विद्यालय के बच्चों और शिक्षकों की सेवा भावना उत्साह और सहभागिता गायत्री महायज्ञ को और भी यादगार बना दिया है. इस यज्ञ स्थल पर उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच भक्तिपूर्ण माहौल उत्पन्न हुआ है दर्शकों को भक्ति तथा पारंपरिक संस्कृति की अनुभूति हुई है. आगे मीडिया को इन्होंने बताया है कि ऐसे-ऐसे कार्यक्रम में जब बच्चे प्रतिभाग करते हैं तो शिक्षा के साथ उनकी बौद्धिक विकास भी अधिक हो जाती है क्योंकि बच्चों को सिर्फ किताबी ज्ञान ही नहीं उनका व्यावहारिक ज्ञान, सामाजिक ज्ञान और धार्मिक ज्ञान होना अति आवश्यक है.


