वैष्णवी मेकअप स्टूडियो एंड एकेडमी की संचालिका वैष्णवी चौधरी ने होली के पावन पर्व पर सभी होली प्रेमियों को होली की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि होली भारत का प्रमुख और प्रधान त्योहार हैं. यह त्यौहार यह भारत की आन-बान-शान है. होली भारत का विशेष और लोकप्रिय त्योहार की श्रेणी में आता है. होली का विशेष रूप से रंगों का भी त्योहार माना जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार होली का यह पवन पर्व फाल्गुन महीने की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है. अंग्रेजी कैलेंडर की माने तो होली का त्यौहार मार्च के महीने में आता है.
भिन्न-भिन्न रंगों से सजा देश
प्रोफेशनल मेकअप आर्टिस्ट वैष्णवी चौधरी ने कहा होली का त्योहार विशेष रूप से भाईचारे, प्रेम, एकता, अखंडता भारत के समृद्धि और इसके साथ ही बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक भी माना जाता है. होली मनाने की परंपरा की बात की जाए तो होली का त्योहार दो दिनों तक मनाया जाता है. इसमें पहला दिन होलिका दहन अर्थात होलिका जलाई जाती है और दूसरा दिन रंगों वाली होली के रूप में यह त्यौहार मनाया जाता है. होलिका दहन के दिन भारत के भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में हर एक गांव, शहर में हर चौराहे पर ढेर सारी लड़कियों को इकट्ठा करके जलाया जाता है. इस प्रकार होलिका दहन का पावन त्यौहार मनाया जाता है. अगर हम इसके पौराणिक कथा के बारे में बात करें तो होलिका दहन की कथा विशेष रूप से भक्त प्रहलाद और उनकी होलिका बुआ संबंध माना जाता है.

ऐसा कहा जाता है कि भक्त प्रहलाद भगवान श्री हरि विष्णु के परम भक्त थे और उनके पिता हिरण्यकशपू राक्षसी कुल के थे. हिरण्यकशपू चाहते थे कि उनका पुत्र भगवान विष्णु की पूजा ना करें बल्कि अपने पिता की ही पूजा करें परंतु उनका पुत्र भगवान विष्णु के अलावा किसी को अपना भगवान नहीं मानता था. इसलिए हिरण्यकशपू ने अपनी बहन होलिका को बुलाया और उसे आदेश दिया कि वह प्रहलाद को लेकर जलते हुए अग्नि में बैठ जाए क्योंकि होलिका को भगवान ब्रह्मा से यह वरदान प्राप्त था कि वह अग्नि में जल नहीं सकती. इस प्रकार होलिका प्रहलाद के साथ जलते हुए अग्नि में बैठी. भगवान विष्णु की कृपा से भक्त प्रहलाद को अग्नि छू नहीं सकी और होलिका जलकर राख हो गई. इस प्रकार राक्षसी मानसिकता का अंत हुआ और भगवान के भक्त की जीत हो गई. हमारे भारतीय धार्मिक ऋषि मुनियों ने इस कथा को होलिका दहन के नाम से संबोधित किया तब से लेकर आज तक होलिका दहन का त्यौहार मनाया जाने लगा.

होली का उत्साह चरम पर
न्यूज़ ऑफ़ नेशन की टीम को वैष्णवी चौधरी ने बताया होलिका दहन की यह घटना हमें यह प्रेरणा देती है कि अच्छाई कभी हार नहीं सकती. दूसरे दिन की होली विशेष रूप से प्रेम और एकता के आकर्षण का केंद्र माना जाता है. क्योंकि इस दिन सभी के चेहरे पर रंग लगे हुए होते हैं. सभी के चेहरे पर एक नई मुस्कान झलकती है. सभी के हाथों में गुब्बारे और पिचकारियों होती है शाम के समय सभी लोग एक दूसरे के घर जाते हैं और एक दूसरे को गले लगाते हैं. हमें इस बात पर भी ध्यान देना होगा कि हमें रासायनिक रंगों का प्रयोग कम से कम करना होगा और फूलों की होली पर विशेष रूप से बल देना होगा. फूलों की होली प्राकृतिक होली का भी उदाहरण माना जाता है. भारत के कई स्थानों पर होली को बसंत उत्सव का भी प्रतीक माना जाता है.

अगर हम होलिका दहन और होली के निष्कर्ष की बात करें तो होली रंगों और फूलों के त्योहारों के साथ-साथ एक दूसरे के दुख में सहानुभूति प्रकट करना, एक दूसरे क सहयोग करना, आपसी मतभेद मिटाकर एक नए जीवन की शुरुआत करना और भारतीय संस्कृति को एक नई मजबूती देना का भी शुभ अवसर माना जाता है. होली के पर्व की सामाजिक विशेषता यह है कि यह दिन लोगों के बीच के दुश्मनी को मिटाकर एक नए संबंध का पहचान देता है. एक दूसरे को रंग लगाते ही लोग अपने पुराने दुश्मनी को भूल जाते हैं. चेहरे पर लगा हुआ रंग यह दर्शाता है कि सभी लोग एक समान हैं. होली का वास्तविक संदेश प्रेम की भावना को बढ़ावा देना है. मैं प्रोफेशनल मेकअप आर्टिस्ट वैष्णवी चौधरी एक बार पुनः कहना चाहता हूं कि फूलों की होली को अपने समाज में जरूर स्थान दें. आप सभी को एक बार फिर होली की शुभकामनाएं देते हुए आपके सुनहरे भविष्य की कामना करती हूं.


